पंजाब के एजी अतुल नंदा ने सोमवार को दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल जालंधर के संस्थापक आशुतोष महाराज मामले में यह स्पष्ट कर दिया कि महाराज समाधि में हैं या मृत, यह तय करना सरकार का काम नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार बिल्कुल तटस्थ है। यह आस्था व विश्वाश का विषय है। सरकार का काम सभी की धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा करना है।
आशुतोष महाराज के शरीर की स्थिति से यह पूरा विवाद जुड़ा है। 2014 में उन्हें समाधि की स्थिति में करार देते हुए उनके शरीर को डीप फ्रिजर में रख दिया गया था। इसके बाद उनके समर्थकों का दावा था कि वे इस शरीर में पुन: प्रवेश करेंगे, ऐसे में उनके शरीर को संरक्षित करना जरूरी है। इसके बाद से ही यह मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है।
कभी महाराज के अपहरण का आरोप लगाया गया तो कभी उनकी हत्या की बात कहते हुए याचिकाएं दाखिल की गईं। आखिरकार एक कथित पुत्र सामने आया, जिसने आशुतोष महाराज को पिता बता उनके शव का अंतिम संस्कार अपना हक बताते हुए शव सौंपने की अपील की।
इस मामले में सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार करने की जिम्मेदारी पंजाब सरकार को सौंप दी थी। इस फैसले को संस्थान, कथित पुत्र, महाराज समर्थकों और पंजाब सरकार ने डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी है। पंजाब सरकार को छोड़कर सभी अपना पक्ष रख चुके हैं और पंजाब सरकार की दलीलें भी अंतिम दौर में हैं।