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Chandigarh News: एलपीयू हिंसा को अशोक मित्तल ने बताया सुनियोजित साजिश, बोले- दुष्कर्म की घटना नहीं हुई

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रेडिट के भ्रामक संदेश और फोन कॉल से छात्रों को भड़काने का आरोप
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बोले- पंजाब की अर्थव्यवस्था और हिंदू-सिख एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश
राजनीतिक साजिश के सवाल पर कहा- ठोस सबूत मिलने पर ही करूंगा खुलासा, दोषी छात्रों पर भी कार्रवाई की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हुई तोड़फोड़ और हिंसा को विश्वविद्यालय के मालिक एवं राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने सुनियोजित साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि परिसर में किसी छात्रा के साथ दुष्कर्म की कोई घटना नहीं हुई। मित्तल के मुताबिक, रेडिट पर आए एक भ्रामक संदेश और फोन कॉल के जरिए छात्रों को भड़काया गया, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया।

दुष्कर्म का आरोप झूठा और बेबुनियाद
मित्तल ने कहा कि वह पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकते हैं कि विश्वविद्यालय के अंदर दुष्कर्म की ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भ्रामक संदेश के बाद छात्रों को उकसाया गया और इसके बाद कैंपस में हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट हुई।
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पंजाब के खिलाफ भी साजिश की आशंका
मित्तल ने कहा कि यह केवल एलपीयू के खिलाफ साजिश नहीं, बल्कि पंजाब के खिलाफ भी बड़ी साजिश हो सकती है। उनके अनुसार, इसके पीछे पंजाब की अर्थव्यवस्था, जालंधर-फगवाड़ा के व्यापारिक नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने, कारोबारियों में भय पैदा करने और हिंदू-सिख एकता को चोट पहुंचाने का उद्देश्य हो सकता है। हालांकि राजनीतिक साजिश के सवाल पर उन्होंने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के वह किसी पर आरोप नहीं लगाएंगे।

बाहरी लोगों के साथ कुछ छात्र भी शामिल होने का दावा
कैंपस में तोड़फोड़ और लूटपाट पर दुख जताते हुए मित्तल ने कहा कि कुछ बाहरी उपद्रवी इसमें सीधे शामिल थे और कुछ छात्र भी उनके साथ खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि जांच में किसी छात्र की हिंसा, तोड़फोड़ या अन्य आपराधिक गतिविधि में भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
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अदालत तय करेगी जांच की दिशा
आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद राजनीतिक साजिश के तहत निशाना बनाए जाने के सवाल पर मित्तल ने कहा कि वह ठोस सबूत के बिना कोई बड़ी बात नहीं कहेंगे। जनहित याचिका और सीबीआई जांच की मांग के बारे में उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली है। मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए आगे क्या होना चाहिए और जांच किस दिशा में जाएगी, इसका फैसला अदालत करेगी।
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