घर से अस्पताल तक की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहीं अर्शदीप ने बताया कि जबसे होश संभाला है मां को जिम्मेदारियों से घिरा हुआ पाया है। घर की हर छोटी से छोटी चीजों की व्यवस्था करने से लेकर हॉस्पिटल के गंभीर मरीजों के इलाज से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य इतनी आसानी से करती हैं कि हम आश्चर्य में पड़ जाते हैं।
कई बार तो हम ये सोचते हैं कि पता नहीं हम उनकी तरह बन पाएंगे कि नहीं। वहीं गुरसिमर के लिए तो मां उनकी बेस्ट फ्रेंड हैं। उनका कहना है कि जब कभी किसी ऐसी स्थिति में फंस जाता हूं जहां रास्ता समझ नहीं आता तब सीधे मां के पास जाता हूं। यकीन मानिए मेरी हर समस्या का समाधान वो चुटकियों में दे जाती हैं। कई बार जब उनके हॉस्पिटल के सहयोगियों से मुलाकात होती है तब वो भी इनकी मेहनत और लगन के बारे में बातें करते हैं।
मां के लिए उनका स्टाफ भी परिवार से कम नहीं
कोरोना महामारी के दौरान वो घर और हॉस्पिटल दोनों जगह की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। बेटी अर्शदीप ने बताया कि मां घर की ही तरह अस्पताल में भी अपने जूनियर स्टाफ को पूरा प्यार देती हैं। कोरोना वार्ड में ड्यूटी लगते वक्त वो सभी की स्थिति देखकर ही उन्हें उसके अनुसार जिम्मेदारी देती हैं जिससे किसी पर ज्यादा दबाव न पड़े। मां ड्यूटी के बाद घर आकर हॉस्पिटल की हर बात बताती हैं। उनकी बातों से ये लगता है जैसे भगवान ने सारी खूबियां एक साथ उनमें ही भर दी हैं। हम भाग्यशाली हैं जो हमें ऐसी मां मिली हैं।