आम आदमी पार्टी में चल रहे घटनाक्रम को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा और उनके गुट की मुश्किलें बढ़ने के आसार हैं। पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल का खैरा से न मिलना और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया के कड़े तेवर के बाद पंजाब इकाई में चर्चाएं तेज हो गई हैं। फायरब्रांड नेता खैरा के साथ दिल्ली की लॉबी का शुरू से ही 36 का आंकड़ा रहा है।
खैरा ने ही सबसे पहले स्वायत्तता का झंडा बुलंद किया था। उनकी मांग थी कि पंजाब इकाई को अपने फैसले लेने के अधिकार खुद दिए जाएं। उसके बाद से ही यहां दिल्ली का सीधा दखल बंद हो गया था। लेकिन मार्च में केजरीवाल द्वारा बिक्रम मजीठिया से माफी मांगने के बाद खैरा सीधे हाईकमान के आमने-सामने आ गए थे। खैरा ने माफी को खारिज कर केजरीवाल की खुलेआम निंदा की थी।
तब से केजरीवाल और खैरा के बीच खटास लगातार बढ़ती ही जा रही थी। उसकेबाद से खैरा कभी भी दिल्ली जाकर पार्टी नेताओं से नहीं मिले। एक बार स्वाती मालीवाल की भूख हड़ताल की हिमायत केलिए गए, लेकिन केजरीवाल से नहीं मिले। यह सब जानते हैं कि आप हाईकमान को आंखें दिखाने वाले लोग पसंद नहीं हैं, इसलिए माना जा रहा है कि अब खैरा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
खैरा के साथ कुछ विधायक हैं, लेकिन इतने नहीं हैं कि वह कोई बड़ा कदम उठा सकें। संगठन के पदाधिकारियों की ओर से उन्हें ज्यादा हिमायत मिलने की उम्मीद नहीं है। पर विदेशों में गठित इकाइयों में जरूर खैरा की पैठ है।
खैरा समर्थक एनआरआईज ने लिखा सिसोदिया को खुला पत्र
सुखपाल खैरा के पार्टी हाईकमान से मुलाकात से पहले ही उनके समर्थक एनआरआई द्वारा पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया को लिखा खुला पत्र मीडिया को जारी किया गया। जिसमें खैरा के स्टैंड की हिमायत की गई है और पंजाब सह-प्रधान डॉ. बलबीर सिंह पर कार्रवाई की मांग की गई है। इस पत्र में यूएस, यूरोप और अन्य देशों के करीब 36 एनआरआई केनाम हैं, जोकि आप से जुड़े हैं।
पत्र में कहा गया है कि पंजाब लीडरशिप में सिर्फ खैरा ही ऐसा चेहरा हैं जो अकालियों और कांग्रेसियों का मुकाबला कर रहे हैं। रेफरेंडम पर उन्होंने कहा है कि वह भारतीय हैं और भारत के संविधान पर विश्वास रखते हैं। पर हमें उन हालातों की पड़ताल करनी चाहिए, जिनके चलते सिखों को यह कदम उठाना पड़ा। लेकिन पार्टी नेताओं ने ही हिमायत के बजाय खैरा के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया।
पत्र में लिखा है कि वे खैरा की हिमायत करते हैं और डॉ. बलबीर से दुखी हैं। जिन्होंने बिना सच जाने खैरा केखिलाफ बयान दे दिया। शाहकोट उप चुनाव में भी पार्टी को 1900 वोट मिले क्योंकि डॉ. बलबीर ने भगवंत मान, खैरा व अन्यों के खिलाफ जाकर अपने ढंग से चुनाव लड़ने की जिद की। उन्होंने मांग की कि डॉ. बलबीर को पद से हटाया जाए।