दशहरे के लिए पुतले बनाते कारीगर।
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चंडीगढ़ में इस बार दशहरा पर्व पर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिलेगी। हिंदू हृदय सम्राट भगवान राम के प्रतीक जिन पुतलों का दहन करेंगे उन्हें मुस्लिम समुदाय के कारीगर तैयार कर रहे हैं। शारदीय नवरात्र के दौरान रामलीला का मंचन होगा। इसके बाद दशहरा का आयोजन होगा। शहर भर में 35 से भी अधिक जगहों पर रामलीला का मंचन होगा। 30 से भी अधिक जगहों पर दशहरा का आयोजन होगा।
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शहर भर में आयोजित होनेवाले दशहरा में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनेंगे। इन पुतलों को बनाने के लिए आगरा, मथुरा, राजपुरा व अन्य जगहों से कारीगर आए हैं। सेक्टर 31 के मंदिर बाबा बालक नाथ वैष्णो गुफा के हॉल में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बन रहे हैं। राजपुरा से आए सोनू खान और उनकी टीम पुतले बनाने में जुटे हैं। सोनू खान का कहना है कि 11 लोगों की टीम दिन रात काम कर रहे हैं। छह दशहरा कमेटियों को पुतला बनाकर देना है। उन्होंने बताया कि वे सबसे बड़ा रावण का पुतला 70 फीट का बना रहे हैं। मेघनाद और कुंभकर्ण 65-65 फीट का होगा।
महंगाई बढ़ी, पैसे नहीं
महंगाई पिछले वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत बढ़ गई है। लेकिन कमेटी वाले पैसे नहीं बढ़ाते हैं। कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि पैसे की कलेक्शन में लोगों ने कमी की है। इस बात को ध्यान रखा जाता है। हमें कम पैसे में भी काम पकड़ना पड़ता है। उन्होंने कहा हम पांच पीढि़यों से रावण के पुतले बना रहे हैं। हमारे परदादा, दादा, पिता और अब मैं और मेरा भाई पुतला बना रहे हैं। पटाखे कमेटी की ओर दे दिया जाएगा। पटाखे जिस दिन पुतला खड़ा करते हैं उसी दिन उसमें लगाते हैं। पुतलों को बारिश और पानी से बचाने के लिए तिरपाल का इंतजाम करते हैं।