चंडीगढ़। शातिरों ने शहर की दो महिलाओं से किराए पर मकान लेने और क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बनकर करीब डेढ़ लाख रुपये की ठगी की है। सेेक्टर-17 थाना पुलिस ने दोनों मामलों में केस दर्ज कर लिया है। इस मामले की जांच साइबर सेल को सौंप दी गई है।
सेक्टर-22 की रहने वाली वनिता सूरी (62) ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने अक्तूबर 2021 में अपना घर किराए पर देने के संबंध में एक ऑनलाइन विज्ञापन पोस्ट किया था। इसके बाद उनके मोबाइल पर एक कॉल आया और कॉल करने वाले ने खुद को दक्षिणी में तैनात सेना अधिकारी बताया। शातिर ने उसे बताया कि उसकी अब हल्लोमाजरा, चंडीगढ़ में तैनाती हो गई है और उसे उसे किराए पर एक घर की जरूरत है। शातिर ने रुपयों की बात करने के बाद पीड़िता को मोबाइल पर एक क्यूआर कोड भेजा और उसे इसे स्क्रैन करने के लिए कहा। उसने कहा कि इसे स्कैन कर लें और रुपये उन्हें ट्रांसफर हो जाएंगे। जैसे ही उन्होंने क्यूआर कोड स्कैन किया तो उनके खाते से 21 हजार रुपये बैंक खाते से उड़ गए। इसके बाद पीड़िता ने एसएसपी पब्लिक विंडो पर शिकायत दी। साइबर सेल उन खातों की जांच कर रही है, जिस खाते में आरोपी ने पैसे ट्रांसफर किए थे।
क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बताकर 83 हजार की ठगी
सेक्टर-23 निवासी गुरजीत कौर ने बताया कि उन्हें अक्तूबर 2021 में एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एसबीआई के क्रेडिट कार्ड डिपार्टमेंट से बताया। उसने कहा कि आपका एसबीआई का क्रेडिट कार्ड पर कुछ रिफंड आया है। उसने गुरजीत कौर से एसबीबीआई के क्रेडिट कार्ड की डिटेल मांगी, लेकिन उसमें ट्रांजेेक्शन फेल हो गई। इसके बाद शातिर ने किसी अन्य क्रेडिट की कार्ड की जानकारी मांगी। उन्होंने आरबीएल के कार्ड की जानकारी दी। इसके बाद 14 हजार 165 रुपये और 24 हजार 282 और 45 हजार 531 रुपये की ट्रांजेक्शन हुई। इसके बाद उन्होने पुलिस को शिकायत दी।
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पीजीआई के डॉक्टर से 40 हजार रुपये धोखाधड़ी करने वाला झारखंड से गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। साइबर सेल ने पीजीआई के डॉक्टर से 40 हजार रुपये की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को झारखंड से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान झारखंड के देवघर निवासी अल्लीमुद्दीन के रूप में हुई जबकि दूसरे आरोपी की मौत हो चुकी है। पुलिस ने आरोपी को शुक्रवार को जिला अदालत में पेेश किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
साइबर सेल प्रभारी हरिओम शर्मा ने बताया कि पीजीआई के डॉ. विपुल अग्रवाल ने वर्ष 2020 में पेटीएम के जरिए एक ट्रांजेक्शन की थी। उनके बैंक खाते से भी रुपये कट गए और रुपये नहीं पहुंचे। इसके बाद उन्होंने गूगल से पेटीएम कस्टम केयर का नंबर ढूंढा और उस पर कॉल की। इसके बाद उन्हें एक अन्य नंबर से कॉल आई और कहा कि वह कस्टमर केयर से बात कर रहे हैं। उन्होंने डॉक्टर के मोबाइल पर लिंक भेजा। जब डॉक्टर ने लिंक को खोला तो कुछ ही देर बाद उनके खाते से 40 हजार रुपये कट गए। इसके बाद उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दी। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने 30 दिसंबर 2012 को केस दर्ज कर जांच साइबर सेल को सौंप दी। पुलिस ने बैंक खाते की जांच की तो यह खाता झारखंड में अल्लीमुद्दीन के नाम पर था। पुलिस की टीम झारखंड गई तो आरोपी घर पर नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने जानकारियों जुटाकर उसे दबोच लिया। हरिओम ने बताया कि इसके साथ धोखाधड़ी करने में एक और आरोपी शामिल था, लेकिन उसकी मौत हो चुकी है। हरिओम शर्मा ने बताया कि कभी भी कस्टम केयर का नंबर गूगल पर मत ढूूंढें। गूगल पर ज्यादातर शातिर ठग सक्रिय हैं।