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रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग के लिए शाबाश चंडीगढ़ !

Fri, 11 Apr 2014 10:33 AM IST
सतिंद्र बैंस/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सिटी ब्यूटीफुल के निवासियों का धन्यवाद। चंडीगढ़ लोकसभा सीट के लिए हुए भारी मतदान के लिए शहरवासी शाबाशी के हक़दार हैं और इसका श्रेय उन सबको जाता है, जिन्होंने अमर उजाला की मतदान बढ़ाने की मुहिम में योगदान दिया और बहुत सी ऐसी संस्थाएं, जिन्होंने अपने तौर पर लोगों को मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया।
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शहर का युवा वर्ग और महिलाएं विशेष सम्मान की हक़दार हैं, जिनके कारण मतदान करने में चंडीगढ़ ने एक नया कीर्तिमान बनाया।

चंडीगढ़ में 74 प्रतिशत वोटिंग हुई जबकि 1984 में अब तक सबसे ज्यादा 68 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई थी। इस भारी मतदान के राजनीतिक मतलब क्या हैं, यह एक अलग मुद्दा है लेकिन इस बार रिकार्डतोड़ मतदान भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत माना जाना चाहिए।

अमर उजाला फाउंडेशन ने लगभग एक वर्ष पहले से नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए विशेष मुहिम चलाई। इस अभियान के लिए चुनाव आयोग ने हमारी सराहना भी की। इस मुहिम के लिए हमारा उद्देश्य था कि ज्यादा से ज्यादा युवक-युवतियां वोटर बनें और अपनी वोट का महत्व समझें।
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पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को मतदान के प्रति प्रेरित करने के लिए हमने विभिन्न कॉलेजों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से सेमिनार आयोजित किए।

चंडीगढ़ एक शहरी क्षेत्र है और यहां बड़ी संख्या में नौकरशाह, पुलिस अधिकारी और रिटायर्ड लोग रहते हैं। माहौल कुछ ऐसा रहा कि युवा वर्ग ने वोटिंग में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई।

लेकिन इस बार जो उत्साह और उम्मीद शहर के युवाओं और महिलाओं में देखने मिली वह एक मिसाल है। आज ऐसा लगता है, शहर की आबोहवा में किसी ने नई जान डाल दी है।

भारी मतदान का होना एक बात को स्पष्ट करता है कि आज का वोटर ख़ासकर युवा बदलाव चाहते हैं। यह बदलाव किसी राजनीतिक पार्टी पर केंद्रित होने की बजाय पूरी तरह भ्रष्ट हो चुके सरकारी तंत्र को बदलने की पहली कड़ी है। एक उम्मीद बनी है कि भारत में लोकतंत्र संवेदनशील है और समय के साथ मजबूत भी हो रहा है।

चंडीगढ़ ही नहीं आज मतदान वाले हरियाणा से 74 और दिल्ली में 64 फीसदी से भी वोटिंग की खबरें हैं। 2012 और 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में वोट 10 फीसदी बढ़े थे। इससे अनुमान लगाया गया था कि शहरी मतदाताओं खासकर मिडल क्लास की चुनाव प्रक्रिया में दिलचस्पी बढ़ रही है और भविष्य की चिंता भी है।

बिहार जैसे राज्य के विधानसभा चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा था। क्या यह उत्साह बढ़ाने वाली बात नहीं है। नए वोटरों में ऐसा उत्साह पहले कभी नहीं देखा गया।

सोशल मीडिया ने इस चुनाव में अहम भूमिका निभाई। जिसका संबंध सीधे युवाओं से रहता है। चुनाव आयोग की कोशिशों के चलते लगभग 10 करोड़ नए वोटर दर्ज हुए।

वोट प्रतिशत बढ़ने से लोगों की भागीदारी तो बढ़ती ही है, हमारा मानना है कि दुनिया में भी इस बात से देश और देशवासियों का सम्मान बढ़ेगा। विकसित देशों में भारी मतदान होता है जो उन देशों के बाशिंदों के मन में अपने देश के प्रति जिम्मेदारी के अहसास का प्रतीक है।

खास बात यह है कि चंडीगढ़ ने इस तरह अपने पड़ोसी राज्यों पंजाब और हिमाचल को भी रास्ता दिखा दिया है, जहां अभी चुनाव होने हैं। आशा की जानी चाहिए कि लोकतंत्र के विकास का यह सफ़र यूं ही जारी रहेगा।
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