पंजाब में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की संभावनाओं के बीच पंजाब के स्वास्थ्यकर्मी सबसे सुरक्षित हैं। आईसीएमआर (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) द्वारा पंजाब के चार जिलों में कराए गए सीरो सर्वे में 83.25 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मचारियों में एंटीबॉडी मिली हैं। सर्वेक्षण की रिपोर्ट में 63.15 प्रतिशत आबादी में कोरोना एंटीबॉडी बन चुकी हैं। अन्य जिलों की अपेक्षा लुधियाना में सबसे अधिक 71 प्रतिशत आम जनसंख्या में एंटीबॉडी पाई गई है।
पंजाब के चौथे सीरो सर्वे के लिए जून में गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला और जालंधर में स्वास्थ्य कर्मचारियों के कुल 400 नमूने लिए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार चारों जिलों के कुल 67.2 फीसदी लोगों में कोरोना वायरस की एंटीबॉडी पाई गई है। सबसे ज्यादा गुरदासपुर के 87 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मचारियों में एंटीबॉडी मिली है।
स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू का भी मानना है कि इस सर्वेक्षण के नतीजों के अनुसार लोगों में कोविड एंटीबॉडी की मौजूदगी का संकेत मिला है जिसका अर्थ है कि पंजाब में दर्ज किए आंकड़ों की अपेक्षा केस बहुत अधिक थे। पंजाब की आबादी में कोविड के प्रसार की संभावना को देखते हुए उन्होंने अपील की है कि पंजाब सरकार द्वारा कोविड संबंधी जारी हिदायतों का पालन किया जाए जब तक सारी आबादी का दो खुराक के साथ टीकाकरण नहीं हो जाता।
पटियाला में सबसे ज्यादा खतरा
तीसरी लहर के दौरान राज्य के पटियाला जिले में सबसे ज्यादा खतरा है। सीरो सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार पटियाला में सबसे अधिक नमूने लिए गए लेकिन एंटीबॉडी मात्र 52 प्रतिशत लोगों में ही मिली। रिपोर्ट के अनुसार पटियाला को आने वाले दिनों में कोरोना वायरस के नमूने बढ़ाने होंगे या फिर कम समय में ज्यादा लोगों के कोरोना का टीका लगाना होगा। जालंधर में करीब उतने ही सैंपल हुए, लेकिन 65.6 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिली है।