फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मैंने टाइटलर को क्लीन चिट नहीं दी: कैप्टन

Mon, 21 Apr 2014 10:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
विज्ञापन
विज्ञापन
कांग्रेस प्रत्याशी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दोहराया कि उन्होंने जगदीश टाइटलर सहित किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी। उन्होंने सिर्फ वही कहा है जो उन्होंने 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद नई दिल्ली में दंगों से तुरंत बाद वहां के लोगों से सुना था।
विज्ञापन


वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि दंगा पीड़ितों के पास अपने चार दिवसीय दौरे के दौरान किसी ने भी जगदीश टाइटलर का नाम नहीं लिया था। ऐसा वह पहली बार नहीं कह रहे, बल्कि 30 साल से कहते आ रहे हैं। अब जाकर अकालियों और भाजपाइयों की नींद खुली और इन्होंने रोष जताने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि पंजाब और खास करके अमृतसर में अपनी संभावित हार देखकर अकाली और भाजपा लोगों को भड़काना चाहती है।

सिख विरोधी दंगे के जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा

कैप्टन ने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगे बहुत ही दर्दनाक व भयानक घटना थी। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह अपने भाई, एक रिश्तेदार के अलावा एक अन्य मित्र के साथ दंगा पीड़ितों के पास पहुंचने वाले पहले व्यक्तियों में से थे। वे दिल्ली के उन सभी इलाकों व गुरुद्वारों में गए थे, जहां दंगा पीड़ितों ने आसरा लिया था।

उन्होंने अकालियों से सवाल किया है कि जब दिल्ली की गलियों में बेकसूर सिखों का बेरहमी से कत्ल किया गया था, वे कहां थे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने एक निजी टीवी चैनल को भी यही बात कही थी कि किसी ने भी उनके सामने टाइटलर का नाम नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि लोगों ने एचकेएल भगत, धर्म दास शास्त्री, अर्जुन दास, ललित माकन और सज्जन कुमार का नाम लिया था। यदि उनको इन कांग्रेसी नेताओं का नाम लेने में कोई परेशानी नहीं है, तो फिर उनको बताए जाने पर वह टाइटलर के नाम का खुलासा क्यों नहीं करेंगे।
विज्ञापन

लोगों के जख्मों को कुरेदते हैं अकाली और भाजपा

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि वह वही बोलेंगे जो उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से देखा और अपने कानों से सुना है, चाहे अकाली व भाजपाई इसको पचा पाएं या नहीं। अकाली-भाजपा वर्करों द्वारा किए गए प्रदर्शन पर कैप्टन ने कहा कि यह इनकी निराशा को दर्शाता है।

इनको पंजाब में कोई भी नहीं पूछ रहा। अमृतसर में इनकी रैलियां फेल हो रही हैं और रद्द हो रही हैं और अब यह भावनात्मक मुद्दों को उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इन्होंने हमेशा से अपनी छोटी सियासत के लिए लोगों के पुराने जख्मों को कुरेदा है और वही सब कुछ अब कर रहे हैं। उनके द्वारा किसी का नाम लेने या फिर न लेने से कुछ नहीं बनता, क्योंकि मामला जांच के अधीन है और इसका फैसला अदालत करेगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें