एक तरफ से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। दूसरी तरफ यही सरकार खुद बेटियों से भेदभाव भी कर रही है। इसका जीता-जागता उदाहरण है पर्वतारोही अनीता कुंडू।
एवरेस्ट अभियान पर जाने से पहले अनीता ने सीएम से आर्थिक मदद की मांग की थी। मगर सरकार ने सिवाय आश्वासन के और कुछ नहीं दिया। उधर, कैथल की पर्वतारोही सीमा गोस्वामी को 7 लाख रुपये की आर्थिक मदद मुहैया कराई गई।
उपलब्धि में अनीता कुंडू सीमा से आगे
दोनों पर्वतारोहियों की तुलना यदि की जाए तो अनीता सीमा से कहीं ज्यादा आगे है। अनीता एक दफा एवरेस्ट की चोटी फतेह कर चुकी है। इस हिसाब से उसके पास सीमा के मुकाबले ज्यादा अनुभव है। इसके अलावा अनीता इस दफा चीन (उत्तरी दिशा) की तरफ से एवरेस्ट पर चढ़ाई कर रही थी, जो कि नेपाल की तरफ वाली चढ़ाई से कहीं ज्यादा कठिन है। उधर, सीमा पहली बार नेपाल की तरफ से एवरेस्ट पर चढ़ाई कर रही थी।
पहली दफा जमीन बेचकर किया था अभियान पूरा
अनीता कुंडू ने वर्ष 2013 में भी एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी और सफलता भी हासिल की थी। उस समय भी अनीता को सरकार की तरफ से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली थी। मजबूरन उसे अपनी जमीन बेचकर पैसे का इंतजाम करना पड़ा था। मगर इस बार उसके पास बेचने के लिए जमीन भी नहीं थी, तो उसने लोन और निजी फाइनेंसरों से 25 लाख रुपये ब्याज पर लिए।
अवॉर्ड में भी हुआ भेदभाव
अनीता ने 18 मई 2013 को एवरेस्ट फतेह किया था। उसके बावजूद अभी सरकार तो दूर की बात, जिला स्तर पर भी उसे सम्मानित नहीं किया गया है। उधर, कैथल जिले की ही एक पर्वतारोही ममता सौदा ने मई 2010 में एवरेस्ट फतेह किया था। केंद्र सरकार ने इस पर्वतारोही को 2014 में पदमश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया।
एवरेस्ट फतेह करने के बाद से अभी तक अनीता को सिर्फ एक विभागीय प्रमोशन मिली है। पहले वह कांस्टेबल थी और अब वह एसआई के पद पर कार्यरत है। अनीता के मुताबिक इस प्रमोशन के लिए भी उसे काफी संघर्ष करना पड़ा।
वर्जन
सरकार को इस तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए था। सीमा भी एक लड़की है और मैं भी एक लड़की हूं। मेरे पास तो पहले से अचीवमेंट भी थी। इस हिसाब से तो मुझे सरकार से मदद मांगने की जरूरत ही नहीं पड़नी चाहिए थी, बल्कि सरकार को खुद मेरी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाने चाहिए थे। मैं एक गरीब परिवार से संबंध रखती हूं।
अनीता कुंडू, पर्वतारोही और एवरेस्ट विजेता
वर्जन
मैंने अभियान पर जाने से पहले सरकार से 21 लाख रुपये की आर्थिक मदद करने अपील की थी, जिसके बाद सरकार की तरफ से मुझे सात लाख रुपये दिए गए।
सीमा गोस्वामी, पर्वतारोही