एक-एक साल कार्यकाल रखना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता तो केंद्र सरकार स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति करे। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का प्रस्ताव असांविधानिक है। हरियाणा के सभी राजनीतिक दलों को ऐसी प्रदेश विरोधी गतिविधियों के विरुद्ध एकजुटता से खड़ा होना चाहिए, क्योंकि, इससे पहले भी पंजाब सरकारें हरियाणा के हितों का अतिक्रमण करने की कोशिश की है।
चंडीगढ़ और एसवाईएल के साथ ही प्रदेश सरकार भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में हरियाणा की स्थायी सदस्यता खत्म करने का मसला भी केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाए। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में पहले सदस्य (पावर) पंजाब से और सदस्य (सिंचाई) हरियाणा से होते थे लेकिन नए नियमों में यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। नए नियमों से हरियाणा के हित सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। हरियाणा सरकार को इसका भी विरोध करना चाहिए।
कांग्रेस-भाजपा ने एसवाईएल निर्माण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए: अभय
चंडीगढ़ के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव का इनेलो ने समर्थन किया। ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने कहा कि हम शुरू से ही चंडीगढ़ के समर्थन में हैं। इनेलो एकमात्र पार्टी है, जिसने एसवाईएल को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाए और गंभीरता से लड़ाई लड़ी। मगर कांग्रेस और भाजपा सरकारों ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किए। अगर वर्तमान और कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री साफ नीयत से प्रयास करते तो हरियाणा को उसके हिस्से का पानी मिल गया होता।
उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश चौटाला के मुख्यमंत्री रहते 2002 में एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के हक में आया था लेकिन पंजाब की कांग्रेस सरकार ने उसे नहीं माना। जितने भी अंतरराज्यीय जल समझौते थे, उन्हें एक विधेयक पारित कर रद्द कर दिया। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब द्वारा पारित उक्त विधेयक को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया।
मुख्यमंत्री ने 2016 में सर्वदलीय बैठक बुलाकर प्रधानमंत्री से मिलने का समय लेने की बात कही थी लेकिन छह साल में नहीं ले पाए। हरियाणा के पंजाब से अलग होने पर दोनों प्रदेशों की सीमाएं निर्धारित करने के लिए 23 अप्रैल 1966 को न्यायमूर्ति शाह की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में हिसार, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, रोहतक, करनाल, नरवाना और जींद तहसील, खरड़ व चंडीगढ़ कैपिटल प्रोजेक्ट, नारायणगढ़, अंबाला और जगाधरी क्षेत्र हरियाणा को दिए लेकिन यह फैसला लागू नहीं हो सका। चंडीगढ़ को हरियाणा और पंजाब दोनों की राजधानी बना दिया गया।