चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय परिसर में 28 जुलाई को पीएचडी शोधार्थी ज्योति की करंट लगने से हुई मौत के मामले में गठित मजिस्ट्रियल जांच समिति अब घटनास्थल का दौरा करेगी। समिति मौके का बारीकी से निरीक्षण कर हादसे की परिस्थितियों और कारणों का पता लगाएगी। साथ ही यह भी जांच होगी कि क्या बिजली व्यवस्था या सुरक्षा इंतजामों में खामी के चलते हादसा हुआ और क्या इसे समय रहते रोका जा सकता था।
जांच टीम घटनास्थल से तकनीकी और अन्य साक्ष्य जुटाने के साथ परिसर में बिजली व्यवस्था, रखरखाव और सुरक्षा मानकों की समीक्षा करेगी। समिति यह देखेगी कि कहीं खुले बिजली के तार, खराब उपकरण या अन्य सुरक्षा संबंधी खामियां तो मौजूद नहीं थीं। हादसे के समय ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
जांच का अहम पहलू पंजाब विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की कथित लापरवाही और अनदेखी की पड़ताल होगा। समिति यह पता लगाएगी कि क्या विद्युत व्यवस्था के रखरखाव में कोई चूक हुई थी, क्या पहले से किसी खतरे की जानकारी थी और इसके बावजूद आवश्यक कदम नहीं उठाए गए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करते हुए रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया जाएगा।
जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी है। समिति की अध्यक्षता यूटी चंडीगढ़ के समाज कल्याण निदेशक नवीन रत्नू करेंगे। डीएसपी (ट्रैफिक) लक्ष्य पांडे और इलेक्ट्रिकल विशेषज्ञ गुरप्रीत सिंह समिति के सदस्य हैं।
बॉक्स-जांच के प्रमुख बिंदु
-घटनास्थल का विस्तृत मुआयना कर साक्ष्य जुटाए जाएंगे।
-हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा।
-कर्मचारियों की लापरवाही और जिम्मेदारी की जांच होगी।
-बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की समीक्षा होगी।
-एक सप्ताह में जिला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।