-न्याय न मिलने का वास्तविक भय साबित करना जरूरी, इसके अभाव में मांग होगी अस्वीकार
-लुधियाना से केस को मलेरकोटला ट्रांसफर करने की मांग हाईकोर्ट ने की खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी मामले को एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित करने की मांग केवल आशंका या अनुमान के आधार पर स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को यह ठोस रूप से साबित करना होगा कि उसे निष्पक्ष न्याय न मिलने का वास्तविक और वाजिब भय है। इसके अभाव में केस ट्रांसफर की मांग खारिज की जाएगी।
यह टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने लुधियाना जिले के जगराओं से एक सिविल मामले को मलेरकोटला या किसी अन्य जिले में स्थानांतरित करने की मांग को खारिज कर दिया। यह याचिका जल कौर (अब दिवंगत) की ओर से दायर की गई थी। याचिका में दलील दी गई थी कि प्रतिवादी जगराओं का स्थानीय वकील है और उसके प्रभाव के चलते याचिकाकर्ता को न्यायालय में उचित कानूनी सहायता नहीं मिल पा रही है।
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि प्रतिवादी पेशे से वकील है, मुकदमे का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता यह भी स्पष्ट करने में विफल रही कि प्रतिवादी ने किस प्रकार उसकी कानूनी सहायता में बाधा डाली या निष्पक्ष सुनवाई को प्रभावित किया। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मामला दशकों से जगराओं में लंबित है और लंबे समय तक याचिकाकर्ता की ओर से स्थानीय वकील ही पैरवी करते रहे तब कभी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी की आयु लगभग 78 वर्ष है और वह वर्षों से सक्रिय वकालत में भी नहीं है। वर्ष 2015 तक याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व स्थानीय वरिष्ठ अधिवक्ता करते रहे जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाद में उठाई गई आपत्ति का कोई ठोस आधार नहीं है।
जस्टिस अर्चना पुरी ने कहा कि केस ट्रांसफर के लिए सामान्य, अस्पष्ट और अनुमान आधारित आरोप पर्याप्त नहीं हैं। याचिकाकर्ता को ऐसे ठोस तथ्य प्रस्तुत करने होंगे, जिनसे यह प्रतीत हो कि निष्पक्ष सुनवाई वास्तव में प्रभावित हो सकती है। इन्हीं आधारों पर ट्रांसफर याचिका खारिज कर दी गई।