पंजाब के युवाओं में विदेश जाकर पढ़ने का जादू सिर चढ़कर बोलता है। हालात ये हैं कि पंजाब से ही 30 हजार करोड़ की राशि हर साल विदेश बतौर फीस जार रही है। मकसद सिर्फ एक होता है कि विदेश में जाकर स्थायी निवासी बनना और बाकी जिंदगी विदेश में गुजारना। हर साल पंजाब से ही अकेले 1.5 लाख युवा कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न संस्थाओं में पढ़ने जाते हैं।
एक छात्र पर औसतन 15 से 22 लाख रुपये वार्षिक खर्च आता है, जिसमें खाने-पीने व कमरे का किराया शामिल होता है। औसतन पंजाब के अभिभावक करीब 30 हजार करोड़ रुपये विदेशी खातों में हर साल फीस के रूप में जमा करवाते हैं, जो पंजाब सरकार के बजट का 20 फीसदी है। अपने बच्चों को 12वीं के बाद से ही विदेश में बसाने की कोशिश में जुट जाते हैं।
कनाडा एक ऐसा देश है, जहां पीआर (स्थाई नागरिकता) लेना सबसे आसान होता है। कनाडा के कई शहर वैंकुवर, सरीं, कैलगरी ब्रैंप्टन पंजाबी मूल के लोगों का गढ़ बन चुके हैं। कनाडा में 12वीं के बाद डिप्लोमा का प्रावधान है, जिसमें बच्चे आसानी से दाखिला ले लेते हैं। कनाडा सरकार विदेशी छात्रों को पढ़ाई के दौरान पार्ट टाइम जॉब का विकल्प देती है। जिससे छात्र पढ़ाई के साथ-साथ कमाई भी कर लेते हैं। पार्ट टाइम जॉब हफ्ते में 10 से 20 घंटे की होती है। ऐसे में पंजाबी मूल के कई लोगों ने कनाडा में जाकर कॉलेज लीज पर ले रखे हैं या खरीद लिए हैं। विद्यार्थियों की भारी मांग से कनाडा का शिक्षा उद्योग पूरी चरम पर है।
कनाडा की तरक्की देख यूके, ऑस्ट्रेलिया ने भी खोले दरवाजे
कनाडा में छात्रों की फीस व कुशल मजदूर मिलने से देश विकास व तरक्की की राह पर है। हालांकि वहां पर चीन, पाकिस्तान समेत कई देशों के बच्चे भी पढ़ने आ रहे हैं लेकिन कनाडा को भारी भरकम फीस, टैक्स से ही विकास के लिए काफी पैसा मिल रहा है। लिहाजा, यूके व ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने अपने दरवाजे पंजाब के विद्यार्थियों के लिए खोल रखे हैं।