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अमृतसर ट्रेन हादसाः सामने आया रेलवे का एक बहुत बड़ा सच और 5 खामियां, जिस वजह से गई 59 जानें

Tue, 23 Oct 2018 01:32 PM IST
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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अमृतसर ट्रेन हादसा
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अमृतसर ट्रेन हादसे के चलते इंडियन रेलवे का एक ऐसा सच सामने आया है, जो हर किसी के लिए हैरतंगेज होगा। वहीं यह 59 मौतों का एक बड़ा कारण भी हो सकता है। वे जिंदगियां बच सकती थीं, अगर ऐसा न होता। बता दें कि रेलवे के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों ने हजारों लोगों की सुरक्षा दांव पर लगा रखी है। अमृतसर में जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां टैक्स चोरों की सहूलियत की खातिर दीवारों की मरम्मत नहीं कराई गई हैं और न ही गलियां बंद कराई गई हैं। यही कारण है कि आसपास के लोग आसानी से दशहरे वाले दिन पटरी पर पहुंच गए थे।
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रोजाना जौड़ा फाटक से करीब 30 ट्रेन अप डाउन करती हैं। अमृतसर आने वाली अधिकतर ट्रेन की स्पीड मानावाला स्टेशन से कम होनी शुरू हो जाती है। ट्रेन शिवाला फाटक, जौड़ा फाटक पर आकर इस कदर धीमी हो जाती है कि कोई आसानी से सामान उतार चढ़ा सकता है। रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से तो कई बार ट्रेन 20-20 मिनट तक खड़ी रहती है। कारण यह है कि दिल्ली व लुधियाना से बिना बिल के आने वाला सारा सामान इन फाटकों पर ही उतारा जाता है, जहां पहले से खड़े आटो में लादकर उसे गंतव्य तक पहुंचा दिया जाता है। क्योंकि माल अगर स्टेशन पर पहुंचा तो वहां पर तैनात मोबाइल विंग की टीमें कार्रवाई कर देती हैं।

शुक्रवार को दशहरा होने के कारण तमाम कारोबार बंद थे। यही कारण है कि ट्रेनें फाटक पर धीमी गति से नहीं रुकी, अन्यथा यह हादसा टल सकता था। जीएसटी विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक, रेलवे स्टेशन पर धंधेबाज काफी कम पार्सल उतारते हैं। शिवाला बाग भाइया रेलवे फाटक, मानावाला रेलवे फाटक, जौड़ा फाटक टैक्स चोरी का गोरखधंधा करने वालों के मुख्य अड्डे हैं। इन स्थानों पर भी ट्रेनों की रफ्तार धीमी होते ही यहां पर टैक्स चोरी का सामान उतारा जाता है। शुक्रवार को दशहरा होने के कारण तमाम कारोबार बंद थे और ट्रेनें फाटक पर धीमी गति से नहीं रुकी, अन्यथा यह हादसा टल सकता था।
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रेलवे की खामियां

अमृतसर ट्रेन हादसा - फोटो : PTI
1- जौड़ा फाटक के समीप रेलवे ट्रैक के आसपास की सारी बाउंड्री धंधेबाजों ने तोड़ डाली है, जिसको दुरुस्त नहीं करवाया गया। रेलवे का नियम है कि हर फाटक से लोहे का जंगला या दीवार बनाकर कोई रास्ता पटरी की तरफ जाने के लिए नहीं छोड़ा जाता।

2- जौड़ा फाटक से धोबीघाट की तरफ जाने वाली खूनी पटरी से दो गलियां कृष्णा नगर इलाके की तरफ खोल रखी हैं, जहां से घटनावाले दिन बड़ी संख्या में लोग पटरी पर आ गए। अगर यह गलियां रेलवे बंद कर देती तो शायद लोगों के पास पटरी तक पहुंचने का कोई रास्ता न बचता।

3- घटनास्थल से 200 मीटर की दूरी पर फाटक पर तैनात गेटमैन ने हाथ में लाइट लेकर ग्रीन सिग्नल दिया। जबकि सामने से दिखाई दे रहा था कि पटरी पर भारी भीड़ जमा है और डीएमयू की स्पीड भी तेज है।

4- प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस फाटक से रोजाना ट्रेनें काफी धीमी स्पीड से निकलती हैं, लेकिन दशहरे वाले दिन डीएमयू काफी तेजी से आई थी और उसकी लाइट भी नहीं जल रही थी।

5- रेलवे की तरफ से हमेशा ट्रेसपासिंग पर शिकंजा कसा जाता है लेकिन हालात यह है कि घटना के पांचवें दिन भी लोग उसी स्थान से पटरी क्रास कर रहे थे, जहां पर 59 लोग मौत का ग्रास बने।
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