अमृतसर में दशहरे के दिन हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे में पहली बार ड्राइवर ने पूछताछ में घटना के बारे में बताया। जौड़ा फाटक पर लोगों को रौंदने वाली ट्रेन के ड्राइवर ने पूछताछ में बताया कि वह जालंधर से चला था। मनावाला से निकला तो ग्रीन सिग्नल था। दुर्घटनास्थल पर धुआं था। तभी अचानक ट्रैक पर भीड़ दिखी। ब्रेक लगाया, लेकिन ट्रेन लोगों से टकरा गई। तभी पीछे से लोगों ने हमला कर दिया।
गार्ड ने बताया कि लोगों ने ट्रेन पर हमला कर दिया है। लिहाजा, यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन नहीं रोकी। फिरोजपुर के डीआरएम विवेक कुमार ने कहा कि ट्रेन 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही थी। ड्राइवर ने ब्रेक लगाए। हादसे के वक्त रफ्तार 68 किमी प्रति घंटा हो गई थी। ट्रेन को रोकने के लिए 600-700 मीटर पहले ब्रेक लगाने पड़ते हैं। उसकी गलती नहीं है।
मैडम, इन लोगों को पटरी पर खड़े होने में तकलीफ नहीं
हादसे से ठीक पहले का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें रावण दहन कार्यक्रम आयोजक कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू को बता रहा है कि सैकड़ों की भीड़ रेलवे ट्रैक पर खड़ी होकर उनका इंतजार कर रही है। वह कहता है, ‘मैडम देखिए, इन लोगों को आपके लिए ट्रैक पर खड़े होने में कोई तकलीफ नहीं है। अगर 500 ट्रेन भी यहां से गुजर जाएं तो भी 5000 लोग आपके लिए यहां खड़े रहेंगे।’
मनोज सिन्हा बोले, सिर्फ ट्रेन की रफ्तार की होगी जांच
रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने शनिवार को कहा कि रेलवे को आयोजन का पता नहीं था। ट्रेन के लिए ग्रीन सिग्नल था। हादसे में रेलवे की चूक नहीं है। सिर्फ ट्रेन की रफ्तार की जांच की जाएगी।
‘भगवान के सामने सब बेबस हैं। यह हादसा कुदरत का कहर है। गुस्सा आना लाजमी है, लेकिन इसमें किसी ने जानबूझकर कुछ नहीं किया है। हादसा ट्रेन चालक की गलती से हुआ। उसने हॉर्न नहीं दिया। इस मामले पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
’- नवजोत सिंह सिद्धू, कांग्रेस नेता
अमृतसर जीआरपी के एसएचओ बलवीर सिंह ने बताया कि घटना में अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जांच के बाद मामले में नाम शामिल किए जाएंगे।