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अमृतसर लैंड स्कैम: विजिलेंस की क्लोजर रिपोर्ट पर एतराज, दोबारा होगी जांच

Fri, 25 Aug 2017 01:23 AM IST
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली
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Punjab CM Captain Amarinder Singh - फोटो : अमर उजाला
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अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट लैंड स्कैम में नया मोड़ आ गया है। अदालत ने विजिलेंस द्वारा पेश की गई केस की क्लोजर रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं पर एतराज जताया है। साथ ही दोबारा रिपोर्ट  विजिलेंस को भेज दी है। वहीं, विजिलेंस को दोबारा उन बिंदुओं पर जांच करने को कहा है।
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अदालत ने मामले की अगली सुनवाई छह नवंबर तय की है। जबकि इससे पहले यह माना जा रहा था कि कैप्टन को अदालत द्वारा बरी कर दिया जाएगा। क्योंकि विजिलेंस द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में उन्हें व अन्य 18 आरोपियों को  क्लीन चिट दे दी गई थी।  इसके अलावा पंजाब विधानसभा के अधिकारियों से लेकर सभी पक्षों की इस संबंध में गवाही तक हो चुकी है। जिसमें सबने कह दिया था कि यदि कैप्टन पर केस खत्म होता है तो उन्हें कोई एतराज नहीं है। जानकारी के मुताबिक वीरवार को कैप्टन करीब पौने ग्यारह बजे के करीब अदालत पहुंचे। इस दौरान अदालत में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।

एसएसपी से लेकर तमाम पुलिस अधिकारी मौके पर थे। इस दौरान बंद कमरे में केस की सुनवाई हुई। अदालत में किसी भी व्यक्ति को जाने नहीं दिया गया। कुछ वकीलों को भी रोका गया। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। इस दौरान सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत अन्य आरोपी अदालत में पेश हुए। साथ ही केस की कार्रवाई चली। 
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जब क्लोजर रिपोर्ट दायर की, तब मैं मुख्यमंत्री नहीं था 

Punjab CM Captain Amarinder Singh
इन तथ्यों पर उठाया गया सवाल 
विजिलेंस की क्लोजर रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं से अदालत सहमत नहीं थी। अदालत ने विजिलेंस को दोबारा से उन बिंदुओं की जांच को कहा है। साथ ही उस रिपोर्ट को भी विजिलेंस को अपनी क्लोजर रिपोर्ट के साथ लगाना होगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि एजेंसी इस बात को साफ नहीं कर पाई है कि अमृतसर इप्रूवमेंट ट्रस्ट की 32.1 एकड़ जमीन प्राइवेट बिल्डर को देने में छूट कैसे दी गई। विजिलेंस से इस संबंधी सारा रिकॉर्ड तलब किया गया। इसमें उस समय की पालिसी समेत अन्य दस्तावेज है। जबकि पहले जांच एजेंसी ने रिपोर्ट के साथ उसे अटैच नहीं किया गथा। इसके अलावा विधानभा की प्रोसिडिंग में टेंपरिंग की बात है। विजिलेंस ने रिपोर्ट में कहा था कि स्पीकर ने कुछ संशोधन किए है। जबकि अदालत इस बात से सहमत नही थी। 

कब दर्ज हुआ था केस 
11 सितंबर 2008 को दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 32.10 एकड़ जमीन प्राइवेट बिल्डर को दे दी गई थी। जिसे घपला बताया गया। 2009 में इस केस में चार्जशीट दाखिल हुई। पांच साल तक चली सुनवाई के बाद कैप्टन हाईकोर्ट पहुंचे और कहा कि ये मुकदमा राजनीतिक साजिश के तहत दर्ज हुआ है। कोर्ट ने दोबारा जांच के आदेश दिए। अक्तूबर 2016 में विजिलेंस ने पाया कि लैंड ट्रांसफर करने में नियम नहीं तोड़े गए हैं। साथ ही अपनी क्लोजर रिपोर्ट अदालत में लगाई थी। 

जब क्लोजर रिपोर्ट दायर की, तब मैं मुख्यमंत्री नहीं था 
इस दौरान जब पत्रकारों ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से पूछा कि आप इससे पहले लुधियाना केस में बरी हो चुके हैं। इस पर उन्होंने कहा कि अमृतसर इंप्रपूवमेंट ट्रस्ट केस में विजिलेंस ने अक्तूबर 2016 में क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश की थी। उस समय वह मुख्यमंत्री नहीं थे। ऐसे में विजिलेंस पर दबाव की बात नहीं कही जा सकती। 
 
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