कोई भी अमृतधारी सिख किरपाण लेकर अदालत में गवाही देने के लिए पेश हो सकता है। यह महत्वपूर्ण व्यवस्था बुधवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दी। अंबाला की एक अदालत में किरपाण लेकर पहुंचने वाले अमृतधारी सिख युवक के मामले को लेकर हाईकोर्ट में जारी सुनवाई पर जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू ने फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि संविधान अमृतधारी सिख को पांच ककार धारण करने का अधिकार देता है।
लिहाजा, इस अधिकार को किसी भी तरह बाधित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने इस फैसले के साथ ही अंबाला सेशन कोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत अमृतधारी सिख युवक को किरपाण के साथ अदालत में गवाही देने से रोका गया था।
यह है मामला
अमृतधारी सिख दिलावर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कहा था कि अंबाला की सेशन कोर्ट ने उसे एक मामले में किरपाण के साथ अदालत में प्रवेश कर गवाही देने से रोक दिया था। दिलावर सिंह की इस याचिका पर हाईकोर्ट ने अंबाला सेशन कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया था। दिलावर सिंह ने हाईकोर्ट में कहा कि वह अमृतधारी सिख है और देश का संविधान उसे अपने धर्म को मानने की स्वतंत्रता देता है।
दिलावर सिंह ने अदालत में कहा कि किरपाण पहनना उसका अधिकार है और संविधान ने ही उसे यह अधिकार दिया है। केवल इस आधार पर उसे अदालत में प्रवेश की अनुमति न देकर गवाही देने से रोकना उसके अधिकारों का हनन है।
18 अप्रैल, 2015 को अंबाला सेशन कोर्ट में दिलावर सिंह एक मामले में गवाही देने पहुंचे थे। उनकी कमर पर लटकी किरपाण देखकर सेशन जज ने उन्हें किरपाण बाहर उतारकर आने और गवाही देने के निर्देश दिए थे, लेकिन दिलावर सिंह ने किरपाण उतारने से मना कर दिया, जिस पर सेशन जज ने आदेश जारी किए कि जब तक वह किरपाण नहीं उतारेंगे, उनकी गवाही दर्ज नहीं की जाएगी। दिलावर सिंह ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू ने 30 सितंबर, 2015 को फैसला सुरक्षित रख लिया था।