दक्षिणी सेक्टरों में बनी कोऑपरेटिव सोसाइटियां अब अफसरशाही से पूरी तरह से मुक्त होंगी। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने 31 मार्च को अधिसूचना जारी कर कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट में संसोधन कर दिया। इससे सोसाइटियों को काफी राहत मिली है।
15 हजार परिवार हैं सोसाइटियों में कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटीज की मैनेजिंग कमेटी का कार्यकाल पांच साल होगा, वहीं सोसइटीज के चुनाव में किसी तरह की प्रशासनिक दखलंदाजी नहीं होगी। सोसाइटियां अपने स्तर पर मैनेजिंग कमेटी का चुनाव करा सकेंगी और इसके लिए रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटी की मंजूरी लेनी जरूरी नहीं होगी।
सोसाइटीज अपने स्तर पर ही ऑडिट भी करा सकेंगी। शहर के दक्षिणी सेक्टरों में 130 के करीब हाउसिंग सोसाइटियां हैं जहां 15 हजार से ज्यादा परिवार रहते हैं।
केंद्र के निर्देश को नहीं माना था
केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 में कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट में संशोधन किया था और जनवरी, 2013 में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एक साल के अंदर इस संशोधन को लागू करने को कहा। जब केंद्र सरकार के आदेशों को लागू नहीं किया गया तो सेक्टर-49 स्थित पुष्पक सोसाइटी में रहने वाले डॉ.आरडी आनंद ने पंजाब एंड़ हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अरूण पल्ली की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर प्रशासन से एक माह के अंदर एक्ट संशोधन को लागू करने को कहा था। 21 मार्च को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन के कोऑपरेटिव सचिव वी लालरेमथंगा और अतिरिक्त सचिव एसके सेतिया ने कहा था कि अधिसूचना फाइल हो गई है और एक माह के अंदर इसे लागू कर दिया जाएगा।
यह होगा बदलाव
प्रशासन ने कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट के सेक्शन 24, 26, 27, 48, 48 (ए), 51 और 71 में संशोधन किया है। अभी कोऑपरेटिव सोसाइटियों की मैनेजिंग कमेटी की टर्म एक साल होती है। हर साल रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज की देखरेख में चुनाव होते हैं और चुनाव के लिए इंस्पेक्टर नियुक्त होता है।
अब सोसाइटीज की मैनेजिंग कमेटी का कार्यकाल पांच साल होगा और सोसाइटीज अपने स्तर पर चुनाव करा पाएंगी और चुनाव के लिए इंस्पेक्टर की नियुक्ति नहीं होगी। पहले जहां सोसाइटीज का ऑडिट रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज कार्यालय की ओर से किया जाता था, वहीं अब सोसाइटीज ऑडिट अपने स्तर पर कराएंगी।
शिकायत मिलने पर पहले जहां रजिस्ट्रार की ओर से सोसाइटीज में एडमिनिस्ट्रेटर की नियुक्ति की जाती थी, वहीं अब सोसाइटी जरूरत पड़ने पर किसी को भी एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त कर पाएंगी। सोसोसाइटीज के लिए हर साल वित्तीय वर्ष के समाप्त होने के छह माह के अंदर रिटर्न फाइल करना जरूरी होगा। यह अभी तक सोसाइटीज पर लागू नहीं था।
ऐसे फाइल दबाता है प्रशासन
केंद्र सरकार से पिछले साल एक्ट में संशोधन संबंधी पत्र आने के बाद प्रशासन के कानून विभाग ने लगभग आठ महीने पहले प्रशासन के आला अधिकारियों से एक्ट में संशोधन को लागू करने को कहा था। लेकिन, प्रशासन के अधिकारियों ने इसमें रुचि नहीं ली। इससे संबंधित फाइल आला अधिकारियों के पास दबी रह गई। अगर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर न होती तो प्रशासन केंद्र सरकार के आदेश को साल भर के अंदर लागू करने में असफल रहता।