1. 15 मई 2021 को सेक्टर 8/9/17/18 लाइट प्वाइंट पर एंबुलेंस की कार से टक्कर, एक घायल
2. 5 अप्रैल 2021 को सेक्टर 39/40/55/56 एंबुलेंस की टक्कर से एक्टिवा चालक बुजुर्ग की मौत
3. 22 जुलाई 2021 को सेक्टर 46/48 विभाजित सड़क पर एंबुलेंस और कार में टक्कर
4. 2 मार्च 2020 को जीरकपुर बैरियर के पास एंबुलेंस और ट्रक में टक्कर, तीन लोगों की मौत
5. 2 जनवरी 2018 को धनास में एंबुलेंस की टक्कर से एक्टिवा चालक की मौत
6. 29 दिसंबर 2020 को हाउसिंग बोर्ड चौक पर एंबुलेंस और ऑल्टो में टक्कर
7. 6 मई 2019 को सेक्टर 31 काली बाड़ी लाइट प्वाइंट पर एंबुलेंस की टक्कर से बाइक सवार की मौत
एंबुलेंस चालकों को जागरूक करने की जरूरत
अराइव सेफ के संस्थापक व सड़क हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने वाले हरमन सिंह सिद्धू का कहना है कि एंबुलेंस आपातकालीन वाहन के अंतर्गत आती है। इस वजह से इनकी गति तय नहीं की गई है। ऐसे में यातायात पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि जिस तरह फूड डिलीवरी ब्वाय को नियमों की अवहेलना के बारे में जागरूक किया गया था, ठीक उसी तरह से एंबुलेंस चालकों को सजग बनाने की जरूरत है।
खाली एंबुलेंस दौड़ाकर उठाते हैं फायदा
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ नवदीप असीजा का कहना है कि अलग-अलग जगहों की सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए गति तय की गई है। एंबुलेंस को इमरजेंसी की वजह से उन्हें रास्ता दिया जाता है, लेकिन कई बार चालक खाली एंबुलेंस को भी तेज गति में दौड़ाते हैं। ऐसे में ये दूसरे के जान पर हमेशा खतरा बना रहते हैं।
- हर चौक और लाइट प्वाइंट पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी हो
- एंबुलेंस चालक को कम से कम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए
- यातायात पुलिस को चालकों को लेकर जागरूकता अभियान करना चाहिए
- संस्था को हमेशा इसका ख्याल रखना होगा कि चालकों के चयन के समय उनको ट्रेनिंग बेहतर दें
- समय समय पर एंबुलेंस की चेकिंग होनी चाहिए
क्या कहना है एंबुलेंस चालकों का
मरीज को जल्दी पहुंचाने का रहता है दबाव
सेक्टर-26 निवासी एंबुलेंस चालक अरविंद ने बताया कि वे साल 2006 से एंबुलेंस चला रहे हैं। उन पर हमेशा इस बात का दबाव रहता है कि मरीज को जल्द से जल्द से अस्पताल पहुंचाया जाए। इस वजह से कई बार गति अनियंत्रित हो जाती है, लेकिन गति उतनी ही रखनी चाहिए, जो नियंत्रित हो सके। कुछ बेलगाम चालकों की वजह से सबका नाम खराब होता है।
एंबुलेंस की स्टेयरिंग अनुभवी ड्राइवर के हाथ में हो
डेराबस्सी निवासी एंबुलेंस चालक रविंदर ने बताया कि मरीज को समय पर पहुंचाना पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरों की जान खतरे में डाली जाए। जो अनुभवी चालक होता है, वह एंबुलेंस को सावधानी पूर्वक चलाता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि एंबुलेंस का स्टेयरिंग अनुभवी ड्राइवर के हाथ में हो।
मरीज के साथ एंबुलेंस की जांच करना संभव नहीं है। एंबुलेंस की आड़ में कानून का उल्लंघन मंजूर नहीं है। स्टेट ट्रांसपोर्ट ऑथिरिटी (एसटीए) से पंजीकृत एंबुलेंस का डाटा मंगवाया गया है। उसके बाद जो भी अनाधिकृत एंबुलेंस होंगी, उन पर कार्रवाई होगी। पंजीकृत ड्राइवरों को जागरूक करने के लिए जल्द ही प्रशिक्षण शिविर का आयोजन भी किया जाएगा। -मनीषा चौधरी, एसएसपी यातायात चंडीगढ़