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चंडीगढ़ में बेलगाम एंबुलेंस: जिस सड़क पर तय है 60 की गति, उस पर एंबुलेंस दौड़ती है 90 की गति से 

Wed, 25 Aug 2021 10:55 AM IST
निवेदिता वर्मा अमित गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

एक तो मोटर व्हीकल अधिनियम के तहत एंबुलेंस की गति सीमा निर्धारित नहीं की गई है। दूसरी वजह मानवीय पक्ष है। आमतौर पर माना जाता है कि एंबुलेंस है तो इसके अंदर कोई गंभीर मरीज होगा। रोका तो मरीज की जान जा सकती है।
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चंडीगढ़ में एंबुलेंस। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मरीज की जान बचाने के चक्कर में एंबुलेंस चालक दूसरे लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। चंडीगढ़ की जिन सड़कों पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 60 किलोमीटर प्रतिघंटा है, वहां एंबुलेंस 90-100 किमी की गति से दौड़ती रहती हैं। न तो उन्हें रोकने वाला कोई है और न ही कभी यह जांच होती है कि एंबुलेंस चालक कितने अनुभवी हैं। इसी का नतीजा है कि सोमवार को पिकाडली चौक पर तेज गति से आ रही एंबुलेंस ने हरी बत्ती का इंतजार कर रहे छह वाहनों को टक्कर मार दी थी, जिसमें एक एक्टिवा चालक की मौत हो गई थी। 

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एंबुलेंस इतनी बेलगाम क्यों हैं, इसकी दो बड़ी वजह है। एक तो मोटर व्हीकल अधिनियम के तहत एंबुलेंस की गति सीमा निर्धारित नहीं की गई है। दूसरी वजह मानवीय पक्ष है। आमतौर पर माना जाता है कि एंबुलेंस है तो इसके अंदर कोई गंभीर मरीज होगा। रोका तो मरीज की जान जा सकती है। इन दोनों वजहों के कारण ट्रैफिक पुलिस कभी एंबुलेंस की जांच नहीं करती, लेकिन जिस तरह से आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, उस हिसाब अब एंबुलेंस की गति और उसकी समय-समय पर जांच की मांग उठने लगी है।

 
एक आंकड़े के मुताबिक, साल 2019 में एंबुलेंस की वजह से पूरे देश में 6500 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 350 लोगों की मौत हुई थी। यह आंकड़ा बताता है कि एंबुलेंस चालक कितनी खतरनाक गति से अपने वाहन को दौड़ाते हैं। ट्रैफिक पुलिस व एंबुलेंस से जुड़े से लोगों ने बताया कि शहर में रोजाना 300 से ज्यादा एंबुलेंस का आना-जाना होता है। ये एंबुलेंस हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से मरीज को लेकर आती-जाती हैं। 

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कब कब हुए एंबुलेंस से हादसे 

1. 15 मई 2021 को सेक्टर 8/9/17/18 लाइट प्वाइंट पर एंबुलेंस की कार से टक्कर, एक घायल 
2. 5 अप्रैल 2021 को सेक्टर 39/40/55/56 एंबुलेंस की टक्कर से एक्टिवा चालक बुजुर्ग की मौत 
3. 22 जुलाई 2021 को सेक्टर 46/48 विभाजित सड़क पर एंबुलेंस और कार में टक्कर 
4. 2 मार्च 2020 को जीरकपुर बैरियर के पास एंबुलेंस और ट्रक में टक्कर, तीन लोगों की मौत 
5. 2 जनवरी 2018 को धनास में एंबुलेंस की टक्कर से एक्टिवा चालक की मौत 
6. 29 दिसंबर 2020 को हाउसिंग बोर्ड चौक पर एंबुलेंस और ऑल्टो में टक्कर 
7. 6 मई 2019 को सेक्टर 31 काली बाड़ी लाइट प्वाइंट पर एंबुलेंस की टक्कर से बाइक सवार की मौत 

एंबुलेंस चालकों को जागरूक करने की जरूरत
अराइव सेफ के संस्थापक व सड़क हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने वाले हरमन सिंह सिद्धू का कहना है कि एंबुलेंस आपातकालीन वाहन के अंतर्गत आती है। इस वजह से इनकी गति तय नहीं की गई है। ऐसे में यातायात पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि जिस तरह फूड डिलीवरी ब्वाय को नियमों की अवहेलना के बारे में जागरूक किया गया था, ठीक उसी तरह से एंबुलेंस चालकों को सजग बनाने की जरूरत है। 

खाली एंबुलेंस दौड़ाकर उठाते हैं फायदा  
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ नवदीप असीजा का कहना है कि अलग-अलग जगहों की सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए गति तय की गई है। एंबुलेंस को इमरजेंसी की वजह से उन्हें रास्ता दिया जाता है, लेकिन कई बार चालक खाली एंबुलेंस को भी तेज गति में दौड़ाते हैं। ऐसे में ये दूसरे के जान पर हमेशा खतरा बना रहते हैं। 
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विशेषज्ञ बोले, ये जरूरी कदम उठाने चाहिए 

  • हर चौक और लाइट प्वाइंट पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी हो 
  • एंबुलेंस चालक को कम से कम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए 
  • यातायात पुलिस को चालकों को लेकर जागरूकता अभियान करना चाहिए 
  • संस्था को हमेशा इसका ख्याल रखना होगा कि चालकों के चयन के समय उनको ट्रेनिंग बेहतर दें
  • समय समय पर एंबुलेंस की चेकिंग होनी चाहिए
क्या कहना है एंबुलेंस चालकों का 
मरीज को जल्दी पहुंचाने का रहता है दबाव  

सेक्टर-26 निवासी एंबुलेंस चालक अरविंद ने बताया कि वे साल 2006 से एंबुलेंस चला रहे हैं। उन पर हमेशा इस बात का दबाव रहता है कि मरीज को जल्द से जल्द से अस्पताल पहुंचाया जाए। इस वजह से कई बार गति अनियंत्रित हो जाती है, लेकिन गति उतनी ही रखनी चाहिए, जो नियंत्रित हो सके। कुछ बेलगाम चालकों की वजह से सबका नाम खराब होता है। 
  
एंबुलेंस की स्टेयरिंग अनुभवी ड्राइवर के हाथ में हो
डेराबस्सी निवासी एंबुलेंस चालक रविंदर ने बताया कि मरीज को समय पर पहुंचाना पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरों की जान खतरे में डाली जाए। जो अनुभवी चालक होता है, वह एंबुलेंस को सावधानी पूर्वक चलाता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि एंबुलेंस का स्टेयरिंग अनुभवी ड्राइवर के हाथ में हो। 

मरीज के साथ एंबुलेंस की जांच करना संभव नहीं है। एंबुलेंस की आड़ में कानून का उल्लंघन मंजूर नहीं है। स्टेट ट्रांसपोर्ट ऑथिरिटी (एसटीए) से पंजीकृत एंबुलेंस का डाटा मंगवाया गया है। उसके बाद जो भी अनाधिकृत एंबुलेंस होंगी, उन पर कार्रवाई होगी। पंजीकृत ड्राइवरों को जागरूक करने के लिए जल्द ही प्रशिक्षण शिविर का आयोजन भी किया जाएगा।  -मनीषा चौधरी, एसएसपी यातायात चंडीगढ़ 

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