150 परिवारों का एक गांव। हर परिवार का हर सदस्य में गजब का हुनर, वो भी 200 साल पुरानी कला को लेकर। इसी से रोजी रोटी कमाते हैं। न कोई सुविधा और न कोई मशीन। हाथों से मूर्तियां तराशते, जिसमें तीन से चार महीने लगते। आंध्रप्रदेश जिले के गांव माथोवाला के कलाकारों की टीम चंडीगढ़ आई तो उनकी ये दिलचस्प कहानी पता चली।
अमर उजाला से खास बातचीत में गांव के ही एक कलाकार दोरा स्वामी बताते हैं कि इनके पास 650 रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक की कलाकृतियां है। यह सभी मूर्तियां देवताओं की हैं। इनमें गणेश, लक्ष्मी, राधा कृष्ण, बालाजी की हैं। इनकी खास बात है कि यह भी दोरा स्वामी की हाथों से सिंगल लकड़ी पर बनाई गई हैं।
दोरा स्वामी ने बताया वह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के माथोवाला गांव के रहने वाले हैं। उनके वंशज करीब 200 वर्षों से इस कला से जुड़े हुए हैं। स्वामी ने बताया कि गांव के सभी 150 परिवार इस काम से अपनी रोजी रोटी चलाते हैं। स्वमी ने बताया एक एक कलाकृति को लकड़ी पर उकारने केलिए दो से चार महीने तक समय लगता है। यह सभी हाथ से बनाई जाती हैं जिनमें किसी तरह का कोई मशीनी काम नहीं होता।