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माधुरी दीक्षित के इस जज्बे को दिल से सलाम कीजिए

Fri, 23 Jan 2015 11:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत
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सिने स्टार माधुरी दीक्षित ने अजन्मी बेटियों को बचाने के लिए जो जज्बा दिखाया, पीएम मोदी ने तो मंच से उनकी तारीफ की अमर उजाला भी दिल से उन्हें सलाम करता है।
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जिंदगी के लिए मौत से जूझ रही आईसीयू में दाखिल अपनी मां स्नेहलता को छोड़कर सिने स्टार माधुरी दीक्षित देश की करोड़ों अजन्मी बेटियों को बचाने की चौथी लड़ाई के लिए पानीपत पहुंचीं। बेटियों के इस अभियान से जुड़ने के लिए मां का आशीर्वाद लेकर पहुंची माधुरी ने हजारों महिलाओं को अपने संबोधन से झकझोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईसीयू में भर्ती माधुरी की मां का जिक्र किया तो वे भावुक हो गईं। नम आंखों से उन्होंने दुआएं कि अपनी मां के ठीक होने और देश की बेटियां को बचाने और पढ़ाने की। समाज और सिस्टम पर भी हमला किया, साथ ही आह्वान किया कि वे कन्या भ्रूण हत्या से पहले बेटी, बहन, बीबी और मां के बारे में जरूर सोचें।
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पर्दे की सिने स्टार ने मंच से महिलाओं को झकझोरा

इससे पहले, पानीपत से शुरू हुए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ राष्ट्रीय अभियान की ब्रांड एंबेसडर माधुरी दीक्षित नैने जैसे ही मंच पर पहुंची तो खासकर महिलाओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। अपने पांच मिनट के संबोधन में माधुरी दीक्षित ने कार्यक्रम में पहुंची जनता से सीधा संवाद किया। उन्होंने बेटियों से जुड़े हर पहलू को छुआ और जमकर कन्या भ्रूण हत्या पर जमकर हमला बोला। कभी शब्दों में दर्द और पीड़ा तो कभी नई उम्मीदें। कभी समाज पर कटाक्ष तो कभी नई आशाएं।

उन्होंने सवाल किया कि समाज में बेटियां जन्म क्यों नहीं ले सकती? क्या बिना महिलाओं के समाज की कल्पना की जा सकती है? किसी परिवार में केवल पुरुष ही हों तो वहां संस्कार, और प्यार कहां से आएगा? जो लोग कन्या भ्रूण हत्या को अंजाम दे रहे हैं, उन्हें नहीं पता कि वे कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स, महादेवी वर्मा और रानी बाई जैसी बहादुर और जुझारू बेटियों के जन्म से पहले मार रहे हैं। अगर इन बेटियों को जन्म लेने दिया जाए तो ये बेटियां भी कमाल कर सकती हैं, बस इन्हें एक अवसर दें, जन्म का। अगर बेटी को जन्म दें तो उन्हें कुषोषण का शिकार न होने दें और अशिक्षित न रहने दें।
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कार्यक्रम से जुड़ने का गर्व है

माधुरी दीक्षित ने कहा कि इस कार्यक्रम से जुड़ने का उन्हें गर्व है, साथ ही कई उम्मीदें भी हैं। उम्मीदें हैं कि अब कोख में कन्याओं का कत्ल नहीं होगा। उम्मीद है कि अजन्मी बेटियां अब इस दुनिया को देखने को नहीं तरसेंगी? पानीपत से शुरू हुए इस अभियान का असर देश के हर गांव और हर गली तक होना चाहिए।

उन्होंने मंच से हजारों महिलाओं से सवाल करते हुए झकझोरा कि अगर बेटियां नहीं होंगी तो आपके बेटों की शादी किससे होगी? महात्मा गांधी की जिक्र करते हुए माधुरी बोलीं, बेटियों को बेटों के बराबर लाने के लिए हमें अपनी सोच को बदलना होगा। जब महिलाएं और बेटियां शिक्षित होंगी, तभी देश और समाज का विकास होगा, तभी भारत दुनिया में चमकेगा।

हर परिवार मेरे परिवार जैसा हो
अपने परिवार के बारे में बताते हुए माधुरी दीक्षित ने कहा कि वे तीन बहनें और एक भाई हैं, इसलिए उन्हें अपने परिवार पर गर्व है। हमारे मां-बाप ने कभी भी हमारे में फर्क नहीं किया। मैं चाहती हूं कि ऐसा परिवार सभी का हो। माधुरी ने कहा कि, वे चाहती हैं हर बेटी को मेरे परिवार जैसा परिवार मिले।
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