चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के लोक प्रशासन विभाग ने सिविल सेवाओं में लोक प्रशासन की प्रासंगिकता: सिद्धांत और व्यवहार विषय पर एक एलुमनाई टॉक का आयोजन किया। इस सत्र को विभाग के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र और लोक सेवा में दशकों के अनुभव वाले सेवानिवृत आईएएस जगजीत पुरी ने संबोधित किया।
अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के आधार पर पुरी ने बताया कि लोक प्रशासन के मूल सिद्धांत जैसे नीति निर्माण, नौकरशाही की जवाबदेही, प्रशासनिक नैतिकता और जन-केंद्रित शासन सिविल सेवाओं के प्रभावी संचालन में भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि लोक प्रशासन की शिक्षा ने उनके नेतृत्व, निर्णय लेने और नागरिक सहभागिता के दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने राज्य की भूमिका को विकास के नियामक और दिशा-निर्देशक के रूप में रेखांकित किया।
उन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों का उल्लेख करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ई-फाइलिंग जैसे सुधारों का उदाहरण देते हुए कहा कि किस प्रकार यह प्रणाली प्रशासन को अधिक पारदर्शी और कुशल बना सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन में आम जनता की भागीदारी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन आवश्यक है। पुरी ने विद्यार्थियों के साथ सिविल सर्विस साक्षात्कार से संबंधित सुझाव भी साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विविध विषयों पर प्रश्नोत्तर भी पूछे। विभागाध्यक्ष डॉ. भावना गुप्ता ने पुरी का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे संवाद विद्यार्थियों को कक्षा में सीखी गई सिद्धांतों को वास्तविक प्रशासनिक जीवन से जोड़ने में मदद करते हैं। उन्होंने इसे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक अवसर बताया, जिससे वह शासन और जननीति निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें।