देश भ्रमण पर निकले इस युवक को देखिए, 225 दिन की यात्रा कर चुका है, लेकिन एक रुपया खर्च नहीं किया और ट्रैवलिंग का तरीका तो बेहद ही अनोखा है। ये हैं इलाहाबाद के अंश मिश्रा। इन्होंने लिफ्ट लेकर 24 राज्यों, चार यूटी और तीन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का सफर तय कर डाला।
इतना ही नहीं, 225 दिन की अपनी यात्रा में उन्होंने एक रुपया तक खर्च नहीं किया। कभी ट्रक तो कभी डंपर तो कभी कैरियर गुड्स पर। भूख लगने पर दोस्त, अंजान लोग और मंदिर-गुरुद्वारे ने सहारा दिया। अंश मिश्रा की यह यात्रा यूं ही नहीं है बल्कि उनका एक मिशन है ‘मिशन इंसानियत’। अंश का मानना है कि पैसा जीवन में सब कुछ है।
सवाल यह है कि पैसा हर जगह काम नहीं आता। अंश ने बताया कि यात्रा का अनुभव शानदार रहा। उन्होंने कहा कि इंसानियत कभी ट्रक ड्राइवर के रूप में मिली तो कभी स्कूटी और भार ढोने वाले वाहनों के चालकों के रूप में। अंश एमसीए और एमबीए पास हैं। उनके घर में चार सदस्य हैं।
तीन फरवरी को शुरू की यात्रा
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- फोटो : File Photo
अंश मिश्रा ने चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि उन्होंने इस साल तीन फरवरी को इलाहाबाद से यात्रा शुरू की थी। घर से उनको हाईवे पर ड्राप किया गया और हाइवे पर उनको पहला वाहन मिला स्कूटी। जिसके चालक ने उनको लिफ्ट दी और वह पांच किलोमीटर दूर तक गए और उसके बाद कैरियर गुड्स मिले जिन्होंने बीस किमी तक उनको पहुंचाया।
अंश मिश्रा ने कहा कि वह अपनी यात्रा के दौरान कन्याकुमारी, फिर पश्चिम बंगाल और उसके बाद नार्थ ईस्ट घूमे। वह तीन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं म्यांमार, भूटान और बांग्लादेश गए। उसके बाद नई दिल्ली, चंडीगढ़, पुडुचेरी, दमन और दीव पहुंचे। उन्होंने बताया कि अब तक वह 24 राज्य घूम चुके हैं और अब पंजाब-हरियाणा, जम्मू, श्रीनगर, हिमाचल जाएंगे।
अंश ने बताया कि वह कानपुर से अलीगढ़ और उसके बाद धीरे-धीरे दिल्ली पहुंच गए। उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनके दोस्त रहते हैं और वह वहीं रुक गए। फिर यमुना एक्सप्रेस-वे पर पहुंचे और वहां से कैरियर गुड्स, टिप्पर और ट्रक की मदद से मथुरा पहुंचे। वहां गुरुद्वारे में गए और वहीं खाना खाया।
नौ घंटे खड़े रहे, दो दिन भूखे
राजस्थान टूरिज्म
अंश मिश्रा ने बताया कि उनको वडोदरा से सूरत जाना था और लिफ्ट नहीं मिली। किसी तरह एक एचपी गैस पेट्रोलियम ने उनकी बातों से प्रभावित होकर उनको लिफ्ट दी। वहीं जब वह जोधपुर से जैसलमेर जा रहे थे तो एक दिन लग गया और उस दौरान उनको खाने को कुछ नहीं मिला।
रात में रहने को तो मिला पर खाना नहीं मिला। जिन्होंने ठहरने की जगह दी उनको लगा कि उनके पास खाना होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। शाम में उठकर चला गया और जिसने लिफ्ट दी उसी ने खाना खिलाया। उन्होंने बताया कि रुड़की से गढ़वाल होते हुए वह एक दोस्त के साथ लिफ्ट लेकर चंडीगढ़ आए।