वर्ष 2003 में पेक के एयरोनॉटिकल विभाग से पासआउट हुआ। उसके बाद डीआरडीओ में वैज्ञानिक बन गया। सुरक्षा के जुड़े हर पहलू को यहां समझने का मौका मिला। पेक की यादें बहुत जुड़ी हैं। यहां का खेल कभी नहीं भूलते। पढ़ाई की गुणवत्ता भी बेहतर है। पेक के युवाओं को डिफेंस में नौकरी करने के लिए प्रेरित कर रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा। डिफेंस के क्षेत्र में रिसर्च की बड़ी संभावनाएं हैं। विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में आने के लिए कहता हूं। साथ ही विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल अनुभव भी बांट रहा हूं। -विक्रांत सत्या, वैज्ञानिक, डीआरडीओ
जितना ज्ञान बटोरा है... उसे अन्य छात्रों में भी बांटूंगा
वर्ष 2009 में बीटेक आईटी की पढ़ाई कर पासआउट हुआ। पेक का अनुभव अच्छा रहा। यहां के शिक्षकों का व्यवहार सबसे अच्छा है। कुरुक्षेत्र हॉस्टल में दोस्तों के साथ बिताए पल नहीं भूल पाता। मैं स्पीकर, लेखक और ब्लॉगर भी हूं। पेक के विद्यार्थियों के लगातार संपर्क में रहता हूं। कई बार व्याख्यान भी दिया है। जितना अनुभव मैंने पाया है विद्यार्थियों को उससे रूबरू करवाता हूं। आगे भी पेक के विद्यार्थियों के लिए उद्योग जगत में कदम रखने के लिए बरती जाने वाली सावधानियां, इस क्षेत्र के अनुभव बांटता रहूंगा। - आत्मा गोदारा, एचआर जेनेरालिस्ट एपैक नेटफिलिक्स