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99 साल का हुआ पेक, पूर्व छात्र बोले- सब पर देश की मिट्टी का कर्ज, पढ़ें विदेश में, नौकरी स्वदेश में

Sun, 08 Nov 2020 09:33 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज नौ नवंबर को अपने 100वें साल में प्रवेश करने जा रहा है। इस साल के शुभारंभ पर एलुमनी ने संकल्प लिया है कि वह पेक के विद्यार्थियों को ज्ञान बांटेंगे। साथ ही रोजगार दिलाने के लिए प्रयास करें। विद्यार्थियों को गाइड भी करेंगे। कुछ एलुमनी का कहना है कि देश की मिट्टी के सभी लोग कर्जदार हैं। इसलिए विद्यार्थी पढ़ाई विदेश में करें, ज्ञान हासिल करें और अपने देश में आकर सेवा करें। इस मिट्टी के प्रति भी अपना बड़ा फर्ज है, जो सभी को निभाना है। एलुमनी कहते हैं कि पेक की यादें वह कभी नहीं भूल पाएंगे। पेक के जरिए उनके करिअर को उड़ान मिली है।

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देश से था प्रेम, बड़े-बड़े ऑफर छोड़ आया
मैं वर्ष 2006 में पेक से पासआउट हुआ। अमेरिका में जाकर मास्टर डिग्री हासिल की। वहां सात साल कंप्यूटर वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। गूगल जैसी बड़ी कंपनी से कई गुना वेतन में जॉब का ऑफर मिला लेकिन देश से प्रेम था इसलिए यहां आकर कंसल्टिंग कंपनी खोली। पेक में हमने रोबोटिक्स क्लब का शुभारंभ किया। साथ ही विद्यार्थियों को उद्योगों के अनुभव बांट रहा हूं। अमेरिका में जो पाया वह भी बताता हूं। पेक के विद्यार्थियों के संपर्क में हूं। आगे भी विद्यार्थियों को ज्ञान बांटता रहूंगा। छात्रों से आग्रह है कि वह विदेश में पढ़ें लेकिन अपने देश में आकर नौकरी करें। -अर्शदीप, बाहगा, कंसल्टिंग कंपनी के संचालक

सामाजिक क्षेत्र में किया है काम, इसे आगे बढ़ाऊंगा
वर्ष 2019 में पेक से पासआउट हुआ। यहां इलेक्ट्रॉनिक विभाग में पढ़ाई की थी। मैंने यूनाइटेड नेशन के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम किया। सामाजिक मुद्दों को करीब से समझा और हल भी किया। वियतनाम, तंजानिया समेत कई देशों के प्रोजेक्ट पर काम किया। गुरुग्राम की एक बड़ी कंपनी में काम किया। इसके बाद आईआईएम कोलकाता, आईआईटी खड़गपुर के एक संयुक्त पाठ्यक्रम के जरिए पीजीडीबीए कर रहा हूं। मैं पेक के विद्यार्थियों को रोजगार के अवसरों से लेकर कई चीजों की जानकारी बांट रहा हूं। -सिद्धांत बंसल, पेक एलुमनी

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डिफेंस में नौकरी करने के लिए युवाओं में जगा रहे अलख

पेक के पूर्व छात्र। - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2003 में पेक के एयरोनॉटिकल विभाग से पासआउट हुआ। उसके बाद डीआरडीओ में वैज्ञानिक बन गया। सुरक्षा के जुड़े हर पहलू को यहां समझने का मौका मिला। पेक की यादें बहुत जुड़ी हैं। यहां का खेल कभी नहीं भूलते। पढ़ाई की गुणवत्ता भी बेहतर है। पेक के युवाओं को डिफेंस में नौकरी करने के लिए प्रेरित कर रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा। डिफेंस के क्षेत्र में रिसर्च की बड़ी संभावनाएं हैं। विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में आने के लिए कहता हूं। साथ ही विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल अनुभव भी बांट रहा हूं। -विक्रांत सत्या, वैज्ञानिक, डीआरडीओ

जितना ज्ञान बटोरा है... उसे अन्य छात्रों में भी बांटूंगा
वर्ष 2009 में बीटेक आईटी की पढ़ाई कर पासआउट हुआ। पेक का अनुभव अच्छा रहा। यहां के शिक्षकों का व्यवहार सबसे अच्छा है। कुरुक्षेत्र हॉस्टल में दोस्तों के साथ बिताए पल नहीं भूल पाता। मैं स्पीकर, लेखक और ब्लॉगर भी हूं। पेक के विद्यार्थियों के लगातार संपर्क में रहता हूं। कई बार व्याख्यान भी दिया है। जितना अनुभव मैंने पाया है विद्यार्थियों को उससे रूबरू करवाता हूं। आगे भी पेक के विद्यार्थियों के लिए उद्योग जगत में कदम रखने के लिए बरती जाने वाली सावधानियां, इस क्षेत्र के अनुभव बांटता रहूंगा। - आत्मा गोदारा, एचआर जेनेरालिस्ट एपैक नेटफिलिक्स
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