पंजाब के आईएएस अधिकारियों ने भी अपना एक दिन का वेतन देने का फैसला किया है। प्रवक्ता के मुताबिक, पंजाब कॉडर के आईएएस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री राहत कोष में एक दिन के वेतन डालने का फैसला किया है, ताकि कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए लगाए कर्फ्यू से प्रभावित होने वाले परिवारों की सहायता की जा सके।
डीजीपी दिनकर गुप्ता ने कहा कि इंडियन पुलिस सर्विस और पंजाब पुलिस सर्विस के अधिकारी स्वैच्छा से पुलिस कल्याण कोष के लिए एक दिन के वेतन का योगदान डालेंगे, ताकि राज्य भर में कोरोना वायरस की महामारी के विरुद्ध जंग में सेवाएं निभा रहे पुलिस मुलाजिमों के लिए कल्याण कार्य किये जा सकें।
गुप्ता ने बताया कि राज्य में 121 आईपीएस और 809 पीपीएस अधिकारियों के एक दिन के वेतन के योगदान के रूप में 33.2 लाख रुपये के लगभग बनता है। उन्होंने बताया कि इस राशि को बहादुर पुलिस मुलाजिमों के लिए प्रबंध करने और विभिन्न कल्याण कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जायेगा।
पंजाब के खाद्य एवं सिविल सप्लाई मंत्री भारत भूषण आशु ने कोरोना बीमारी के मुकाबले और जरूरतमंदों की मदद के लिए अपना एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने का फैसला किया। सोमवार को जारी बयान में आशु ने कहा कि उनका विभाग जरूरी खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को इस संकट की घड़ी में भी यकीनी बनाएगा। उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कि वह इस मुश्किल घड़ी में सरकार की हिदायतों की पालना को यकीनी बनाएं ताकि राज्य के लोगों की सुरक्षा यकीनी बनी रहे।
तृप्त बाजवा ने एक महीने का वेतन देने का फैसला किया
पंजाब के ग्रामीण विकास, उच्च शिक्षा और पशु पालन, डेयरी विकास और मछली पालन मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने कोरोना वायरस के कारण पैदा हुई स्थिति से निपटने और लोगों की मदद के लिए एक महीने का अपना वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का फैसला किया है। बाजवा ने लोगों से भी अपील की है कि इस संकट की घड़ी में सरकार द्वारा लोगों को इस आपात स्थिति से बचाने के लिए उठाए जा रहे हर कदम का पूर्ण रूप से सहयोग करें।
रंधावा ने किया एक माह का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का एलान
रंधावा ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण पैदा हुई स्थिति का मुकाबला करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा रजिस्टर्ड कामगार के लिए 3000 रुपये की तत्काल राहत देने का फैसला किया गया है। रंधावा ने कहा कि दिहाड़ी और अपना काम-धंधा करके गुजारा करने वालों के लिए यह मुश्किल घड़ी है, जिस कारण उन्होंने अपने एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए दान करने का फैसला किया है।