चंडीगढ़। सीनियर एडवोकेट व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि पंजाब से देश में नई क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। पंजाब ने हमेशा अन्याय की लड़ाई में अहम रोल निभाया है। लोगों को अधिकार दिलाने के लिए पंजाब, पंजाबियत और सिखों ने अगुवाई की है। दो हफ्ते से ज्यादा वक्त से किसान कृषि कानून के खिलाफ सड़कों पर हैं और सरकार उनकी सुध नहीं ले रही, लेकिन उनकी लड़ाई बेकार नहीं जाएगी। इस समय पूरे देश की नजरें पंजाब पर टिकी हैं। जागदा पंजाब की ओर से भारत में लोकतंत्र का संकट विषय पर चंडीगढ़ के किसान भवन में आयोजित गोष्ठी में प्रशांत भूषण शनिवार को हिस्सा लेने आए थे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को इमरजेंसी में इतना नुकसान नहीं हुआ था, जितना बीते छह साल में हुआ है। सरकार के खिलाफ जो आलोचना करता है, उसकी हत्या हो जाती है या उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है। देश में हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत फैलाई जा रही है। लोगों को डराया जा रहा है और सरकार कहती है कि सब-कुछ ठीक है।
चीन की सेना ने देश में घुसकर जमीन कब्जा कर लिया है। नोटबंदी से अर्थव्यवस्था नीचे आ गई। लॉकडाउन से 10 करोड़ लोगों की नौकरी चली गई। फिर भी सरकार कहती है कि देश में सब ठीक चल रहा है। न्याय दिलाने वाली संस्था पर सरकार ने कब्जा कर रखा है।
दिल्ली दंगों पर हो रही गिरफ्तारी पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दंगों की आड़ में नागरिक संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जिन लोगों ने गोली मारने की बात कही थी, उन पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। यहां तक कि उनसे पूछताछ भी नहीं की गई। धरना-प्रदर्शन तो लोगों का मौलिक अधिकार है। देश के मीडिया प्रतिष्ठानों पर भी सरकार ने कब्जा कर रखा है।
पिछले चार महीने से असल मुद्दों की बजाय मीडिया रिया चक्रवर्ती के पीछे पड़ी है। विरोधियों को दबाने के लिए सरकार ने सभी स्वतंत्र एजेंसियों को अपने कब्जे में ले लिया है। चुनाव आयोग भी सरकार के नियंत्रण में काम कर रहा है। प्रत्याशियों के चुनाव खर्च की सीमा तो तय कर दी, लेकिन राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने वाले कारपोरेट कंपनी की खर्च सीमा हटा दी गई। यह पता भी नहीं किया जा सकता कि किस पार्टी ने कितना चंदा दिया है। इस बीच एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस समय मोदी का विकल्प राहुल गांधी है। राहुल गांधी झूठ नहीं बोलता है। इस मौके पर संस्था के प्रो. मंजीत सिंह, प्रो. सुखदेव सिंह सिरसा व डॉ. अजयपाल बराड़ सहित कई एडवोकेट व अन्य लोग मौजूद रहे।