पाकिस्तान की ओर से पुंछ और राजौरी में नियंत्रण रेखा से लेकर अरनिया सेक्टर में एलओसी तक की गई अंधाधुंध फायरिंग को देखते हुए पंजाब से सटी भारत-पाकिस्तान सीमा पर अलर्ट जारी कर दिया गया है।
गुरदासपुर के बार्डर पर जवानों की संख्या बढ़ाई गई है क्योंकि ये इलाका जम्मू-कश्मीर के पास है। बीएसएफ पंजाब के आईजी अशोक कुमार के मुताबिक पंजाब के बार्डर पर इतना खतरा नहीं है, फिर भी चौकसी बढ़ा दी गई है।
बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि पंजाब के बार्डर पर सर्दी शुरू होते ही चौकसी बढ़ा दी जाती है। धुंध के दौरान पाकिस्तान की तरफ से हेरोइन व हथियारों की तस्करी बढ़ जाती है। जम्मू-कश्मीर में हुई गोलीबारी को देखते हुए यहां पर अलर्ट जारी किया है।
गुरदासपुर बार्डर जम्मू-कश्मीर के पास है और यहां का कुछ इलाका अतिसंवेदनशील है। इसी कारण यहां जवानों की संख्या बढ़ा दी गई है। बार्डर पर पाकिस्तान की तरफ हो रही गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
वहीं पंजाब के सीमांत क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई है वहीं इसका कोई भी असर अटारी-वाघा सड़क सीमा पर देखने को नहीं मिला। बीएसएफ के आईजी अशोक कुमार ने बताया पर्यटक रोज की तरह रिट्रीट देखने के लिए आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रोज की तरह हजारों की संख्या में पर्यटकों ने जाकर रिट्रीट सेरेमनी का आनंद उठाया। हालांकि इस बार बीएसएफ और पाक रेंजर्स के तेवर रिट्रीट के दौरान कुछ सख्त दिखाई दिए। उधर, पुलिस और सिविल प्रशासन की ओर से सीमांत गांवों में पुलिस की गश्त को बढ़ाया गया है।
सीमा क्षेत्र के ग्रामीणों को सेना पर भरोसा
गुरदासपुर। कश्मीर घाटी में पाकिस्तान की ओर से लगातार सीज फायर के उल्लंघन की खबरें आने के चलते गुरदासपुर और पठानकोट से सटे बॉर्डर एरिया में सेना की चौकसी बढ़ा दी गई है। हालांकि सीमा पर बसे गांवों के लोग बेफिक्र हैं। उनमें पाकिस्तान के इस रुख को लेकर चिंता का आलम तो है, लेकिन वे खुद को असुरक्षित महसूस नहीं कर रहे।
जीरो लाइन पर स्थित सिंबल स्कोल, खोजकीचक्क, ठाकुरपुर, ममियां चकराजा, भरियाल, चौंतरा सलाज के अलावा डेरा बाबा नानक क्षेत्र के ठेठरके, खासा, घनियां, ठठियां, रोसे पकीवां और कलानौर सरीखे गांवों के लोग पूरी तरह निश्चिंत हैं। उनका कहना है कि सीमा पर अभी तक कोई संदेहास्पद गतिविधि नजर नहीं आई है। वहीं सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों का मानना है कि जवान सीमा पर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। सीमा पर नजर रखने के मामले में ग्रामीण भी उनकी मदद कर रहे हैं।