चंडीगढ़। विश्व लिवर दिवस के उपलक्ष्य में पीजीआई में सोमवार को अल्कोहल यूज डिसऑर्डर क्लीनिक की शुरुआत की गई। क्लीनिक का उद्घाटन पीजीआई निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने किया। उन्होंने बताया कि शराब का सेवन करने से केवल लिवर ही नहीं शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में इस क्लीनिक के माध्यम से लिवर के विशेषज्ञ मनोचिकित्सकों के सहयोग से उन लोगों का इलाज करने का प्रयास करेंगे। उन्हें नशा मुक्ति के लिए जागरूक किया जाएगा ताकि उन्हें लिवर संबंधी परेशानी के साथ ही शराब से होने वाली अन्य समस्याओं से भी बचाया जा सके। हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ अजय दुसेजा ने बताया कि लिवर संबंधी कई तरह की परेशानियों को जीवनशैली में बदलाव करके रोका जा सकता है। शराब का सेवन भी जीवनशैली में होने वाले बदलाव में शामिल है। वहीं मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डी. बसु ने कहां की इस क्लीनिक को नशा मुक्ति आउटरीच कार्यक्रम के एक भाग के रूप में शुरू किया गया है। जहां शराब से संबंधित लिवर रोग और नशीली दवाओं के दुरुपयोग के कारण पुराने वायरल हेपेटाइटिस के रोगियों को परामर्श दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो उन्हें वहां दवा भी उपलब्ध कराई जाएगी या फिर नशा मुक्ति केंद्र रेफर किया जाएगा।
तीन दिनों तक जागरुकता कार्यक्रम
पीजीआई हेपेटोलॉजी विभाग विश्व लिवर दिवस पर तीन दिनों तक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसमें 18 से 20 अप्रैल तक लिवर स्वास्थ्य कल्याण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत मरीजों की वायरल मार्कर के लिए फाइब्रोस्कैन और खून के नमूने की जांच की जाएगी।