पुलिस की ओर से पकड़ी गई शराब के दौरान अदालत की ओर से लगभग आठ करोड़ रुपया का जुर्माना वसूला गया है। उस दौरान अदालत की ओर से एक बोतल शराब पर एक हजार रुपया जुर्माना हुआ करता था। रेडक्रास के जिस भवन में शराब को रखा गया है।
उसका किराया 25 लाख रुपये से ऊपर बनता है। पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से मांगे जाने वाले बिल को मुख्यालय भेजा जाएगा। वहां से आने वाली स्वीकृत के बाद प्रशासन को उसका भुगतान किया जाएगा।
शराब पकड़ने जाने के बाद जिले में तैनात रहे 18 आईपीएस अधिकारी
पुलिस व प्रशासन की ओर से हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। यह सवाल अब भी खड़ा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार 23 साल के दौरान इन थानों में तैनात रहने वाले कुछ थाना प्रभारी की मौत भी हो चुकी है। कुछ मालखाना मुंशी रिटायर हो गए हैं। शराब बंदी के बाद अब तक 18 आईपीएस अधिकारी जिले में तैनात रहे हैं।
यहां तैनात रहने वाले चार आईपीएस अधिकारी तो डीजी रैंक तक पहुंच गए हैं। वहीं, दूसरी ओर रेडक्रास की ओर से भी अपने भवन को खाली कराने व किराया वसूलने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। रेडक्रास की ओर से किराये को लेकर पत्र तो आता था, मगर उसकी भी खानापूर्ति हो रही थी।
शराब बंदी के दौरान पकड़ी गई शराब की बोतलों को अदालत से अनुमति लेकर नियमानुसार नष्ट किया गया है। रेडक्रास के भवन का जो भी किराया होगा। उसे मुख्यालय भेजा जाएगा। मिलने वाली अनुमति के अनुसार उसका भुगतान होगा। - राहुल शर्मा , पुलिस अधीक्षक।