16 साल पुराने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में 134 क्लर्कों की भर्ती घोटाले में जिला अदालत ने फैसला सुनाते हुए तत्कालीन शिक्षामंत्री व अकाली नेता तोता सिंह को बरी कर दिया। हालांकि इस मामले में चार लोगों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 20 हजार जुर्माना लगाया गया।
दोषियों में उस समय के बोर्ड के सचिव जगजीत सिंह सिद्धू, ओएसडी चेयरमैन अमर सिंह, सिलेक्शन कमेटी मेंबर पवितरपाल कौर, जोरा सिंह मान शामिल हैं। केस के एक आरोपी तीर्थ सिंह ढिल्लों की मौत हो चुकी है। फैसले के बाद अदालत से बाहर आते ही तोता सिंह व उनके वकील सतनाम सिंह कलेर ने बताया कि इसमें उन्हें जानबूझकर फंसाया गया था। यह बोर्ड का अपना मामला था। अदालत के फैसले से उनके विश्वास की जीत हुई है।
यह था मामला
अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में 2002 में शिक्षा बोर्ड में 134 क्लर्कों की भर्ती की गई थी। जैसे ही कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस सरकार सत्ता में आई, उसने भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। आरोप था कि भर्ती नियमों को ताक में रखकर की गई है। वहीं विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से 14 जून, 2002 में विजिलेंस के थाने में तोता सिंह समेत कई लोगों पर केस दर्ज हुआ था।
इस दौरान बोर्ड के चेयरमैन केहर सिंह, सचिव जगजीत सिंह सिद्धू, असिस्टेंट सेक्रेटरी महिंदर सिंह करीर, ओएसडी वाइस चेयरमैन अमर सिंह, स्पेशल सेक्रेटरी टू चेयरमैन तेज राम गोयल, ओएसडी टू चेयरमैन चरनजीत सिंह मीलू, असिस्टेंट सेक्रेटरी वरिंदर कुमार, अमरजीत सिंह मुल्तानी, सलेक्शन कमेटी मेंबर पवितर पाल कौर, कर्नल जोरा सिंह मान व तीर्थ सिंह के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।