लीज डीड को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया
99 साल के लिए वाहिद संधार शुगर मिल ने जमीन लीज पर ली लेकिन इसमें एक नई शर्त डाल दी गई कि अब वाहिद संधार शुगर्स लिमिटेड फगवाड़ा ऋण लेने के लिए संपत्ति को किसी भी बैंक और वित्तीय संस्थान के पास गिरवी रख सकता है, जिसमें जगतजीत शुगर मिल्स लिमिटेड कंपनी को कोई आपत्ति नहीं है।
इस लीज डीड को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया, ताकि ऋण आदि लेते समय बैंक और सरकार को धोखा दिया जा सके। वाहिद संधार शुगर्स लिमिटेड ने ऋण की गारंटी के रूप में इस सरकारी भूमि को गिरवी रखा और अवैध वित्तीय लाभ प्राप्त कर लिया। इस बीच समांतर रूप से राजस्व विभाग में भी खेल शुरू किया गया। 1974 तक की जमाबंदी पर हर बार लाल पैन से पटवारी का नोट लगता था कि जमीन सरकार की है, लेकिन 1974 की जमाबंदी के बाद नोट ही लिखना बंद कर दिया गया।
निदेशकों ने फिर बनाई नई कंपनी
2006 में सारा रिकॉर्ड कंप्यूटराइज होने लगा और कंप्यूटर पर भी जमाबंदियों पर लिखा लाल रंग का नोट उड़ा दिया गया कि जमीन सरकारी है, इसे बेचा या इस पर कर्ज नहीं लिया जा सकता। वहीं वाहिद संधार शुगर्स लिमिटेड के निदेशकों ने शुगर मिल प्लाजा प्राइवेट लिमिटेड, जीटी रोड फगवाड़ा नाम से नई कंपनी बनाई जो 2010-11 में पंजीकृत हुई थी। 2013-14 में इन निदेशकों की मिलीभगत से मैसर्स डब्लूएस फिटनेस प्राइवेट लिमिटेड, पीएसईबी कार्यालय के सामने, बंगा रोड, फगवाड़ा नामक अन्य कंपनी भी पंजीकृत की गई, जिसके निदेशकों ने मिलीभगत से सरकारी रकबे का कुछ हिस्सा बेच दिया। 2017 में 4 कनाल भूमि बेची गई और 251 कनाल 18 मरला भूमि भारतीय स्टेट बैंक, औद्योगिक वित्त शाखा, ढोलेवाल चौक, लुधियाना के पास गिरवी रखी गई। रिकॉर्ड में ही नहीं ऑनलाइन रिकॉर्ड में पूरी हेराफेरी कर दिखाया गया कि जमीन के मालिक वाहिद के परिवारिक सदस्य हैं।
साजिश के तहत रजिस्ट्री एसबीआई लुधियाना के पक्ष में की
जगतजीत शुगर मिल्स कंपनी लिमिटेड फगवाड़ा के स्वामित्व वाली 6 कनाल 4 मरले सरकारी भूमि के पंजीकरण में तत्कालीन राजस्व विभाग के अधिकारियों ने पंजाब पंजीकरण मैनुअल 1929 की धारा 135 का उल्लंघन कर किया। यह जानते हुए भी कि यह सरकारी जमीन है और इसे बैंक के पास गिरवी नहीं रखा जा सकता। राजस्व अधिकारियों ने आपराधिक साजिश के तहत इस जमीन की रजिस्ट्री भारतीय स्टेट बैंक लुधियाना के पक्ष में कर दी। दिलचस्प पहलू है कि 1973 में मिल प्रबंधन ने मिल की जमीन का एक हिस्सा प्लॉट (अधिशेष भूमि) बनाकर बेचने की कोशिश की थी, इस संबंध में पंजाब के राजस्व विभाग के तत्कालीन उप सचिव ने एक पत्र जारी किया। जिसमें जमीन की बिक्री पर रोक लगाते हुए कमिश्नर कपूरथला को सख्त आदेश जारी किए गए थे।