अकाली नेता तख्तियां और बैनर लेकर नारेबाजी करते हुए बढ़ने लगे। आमतौर पर जब भी सीएम आवास की तरफ मार्च का एलान होता है तो पुलिस एमएलए हॉस्टल के गेट पर ही बैरिकेडिंग करके प्रदर्शनकारियों को रोक लेती है। लेकिन ऐन मौके पर बदली रणनीति के कारण पुलिस को भनक नहीं लगी।
उसके बाद चंडीगढ़ क्लब रोड के पास पहली बैरिकेडिंग में सात-आठ पुलिसकर्मी थे। वे अकालियों को रोक नहीं पाए और प्रदर्शनकारी सीएम आवास की ओर बढ़ने लगे। यह देखते ही सीएम के सुरक्षाकर्मियों ने फौरन बसें लगाकर रास्ता बंद कर दिया और मानव चेन बना ली। लेकिन अकालियों ने इस घेरे को भी तोड़ दिया और बिलकुल सीएम आवास के पास पहुंच गए। इस बीच यूटी के कुछ पुलिसकर्मी और सीएम सिक्योरिटी के लोग भी आ गए।
उन्होंने मजबूत सुरक्षा घेरा बना कर बड़ी मुश्किल से प्रदर्शनकारियों को रोका। इस पर अकालियों ने वहीं धरना देकर नारेबाजी शुरू कर दी। दोपहर सवा दो बजे यूटी पुलिस उन्हें दो बसों में बिठाकर थाने ले गई। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। थाने में भी अकाली काफी देर तक नारेबाजी करते रहे। रोष प्रदर्शन में सांसद बलविंदर भूंदड़, हरी सिंह जीरा, गुलजार सिंह रणिके, जगीर कौर, डॉ. दलजीत चीमा समेत कई नेता शामिल हुए।
कार्रवाई और माफी तक जारी रहेगा आंदोलन : बादल
सुखबीर बादल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने गुरु साहिबान का घोर अपमान किया है। जब तक सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह माफी नहीं मांगते और इतिहास की किताबों में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई नहीं की जाती, आंदोलन जारी रहेगा। सिख धर्म व विरासत के सम्मान को अकाली दल कोई भी कुर्बानी देने को तैयार है। कांग्रेस ने जानबूझकर दो बार इतिहास के साथ ऐसी छेड़छाड़ की है कि आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली विरसे पर फख्र न महसूस करें।