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अजीब प्रथा: अमावस्या पर गांव में बैन रहती है मामा या साले की एंट्री

Sun, 04 Sep 2016 08:57 AM IST
नसीब सैनी/अमर उजाला, कैथल(हरियाणा)
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कैथल के गांव दीवाल का अनोखा रिवाज
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देश के एक गांव में बेहद अजीब प्रथा निभाई जाती है। यहां साल में एक दिन घर में मामा और साले की एंट्री बैन कर दी जाती है। ये अनोखा गांव है, हरियाणा के कैथल में। यहां के गांव दीवाल में हर साल की तरह भाद्रपद की अमावस्या पर गांव दीवाल में किसी भी घर में मामा या साले की एंट्री बैन रही और न ही किसी घर में खाने में दाल-रोटी, सब्जी बनी। खाने में नमक-मिर्च का किसी भी प्रकार से इस्तेमाल नहीं हुआ।
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वीरवार को पूरे गांव ने देसी घी के माल पूड़े और खीर बनाकर खेतों में पुराने और ऐतिहासिक बड़ वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना की। मामा या साले के लिए गांव में इस अघोषित प्रतिबंध की परंपरा का दीवाल गांव में सदियों से निर्वहन हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बच्चे के पास सांप को देख मार देने के बाद हुई बच्चे की मौत की घटना के बाद इस परंपरा की शुरुआत हुई थी।

बुजुर्ग महिलाओं भागो देवी, सोनण देवी, दिल्लों देवी ने बताया कि भाद्रपद की अमावस्या के दिन गांव के खेतों में खड़े बड़ (बरगद) के पेड़ के नीचे पूजा अर्चना करते हैं। विशेष रूप से नवविवाहित जोड़े अपने घर से गठजोड़े में बंधकर वहां जाते हैं और यह गठजोड़ा बड़ के पेड़ के नीचे खोला जाता है। पूरे गांव के नवविवाहित बच्चों के साथ और गांव छोड़कर बाहर जा चुके परिवार भी इस दिन यहां आकर पूजा करते हैं।
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प्रतिबंध का ये था कारण

कैथल के गांव दीवाल का अनोखा रिवाज
सरपंच जगदीश राठी, पंच देव सिंह, राजेश, जसबीर सिंह, चंदा ने बताया कि पुराने समय में गांव में एक परिवार में बच्चे का मामा आया था। उसने देखा कि एक बच्चे के पास सांप है। मामा ने सांप को मार दिया तो बच्चे की भी उसी समय मौत हो गई थी।

तभी से परंपरा शुरू हुई कि गांव में भाद्रपद मास की अमावस्या के दिन कोई मामा या साला नहीं आएगा। इस दिन खाने में घर में केवल देशी घी के माल पूड़े और खीर बनती। वीरवार को भाद्रपद अमावस्या के उपलक्ष्य में गांव में मेले का आयोजन हुआ। गांव के लोगों ने दूरदराज से पहुंच कर पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगी।
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