उत्तर भारत के 150 विश्वविद्यालयों के 150 वाइस चांसलर समानता और टिकाऊ समाज सुनिश्चित करने के लिए सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर विचार-विमर्श करने के लिए दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति को लागू करने में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने क्या चुनौतियां है, इस पर भी विभिन्न यूनिवर्सिटी के वीसी से उनके विचार लेकर रिपोर्ट बनाई जाएगी।
इसकी जानकारी एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी (एआईयू) के अध्यक्ष कर्नल डॉ. जी थिरुवासागम ने गुरुवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में साझा की। दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) की ओर से संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से किया जा रहा है। इसकी मेजबानी हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित शूलिनी यूनिवर्सिटी की ओर से की जा रही है। यह सम्मेलन शुक्रवार से शुरू हो रहा है।
इसमें 50 कुलपति व्यक्तिगत तौर पर ऑफलाइन माध्यम में हिस्सा लेंगे और लगभग 100 कुलपति ऑनलाइन माध्यम में सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव राम सुभाग सिंह करेंगे और शूलिनी यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो. पीके खोसला विशिष्ट अतिथि होंगे। इस दौरान यूनिवर्सिटी के वीसी सभी के लिए एक बेहतर और अधिक टिकाऊ भविष्य प्राप्त करने का खाका तैयार करने पर दिए सुझावों की रिपोर्ट बनाई जाएगी और भविष्य में उसके क्रियान्वयन पर काम किया जाएगा।
ये प्रतिनिधि लेंगे सम्मेलन में हिस्सा
सम्मेलन में रयात बहरा यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. परविंदर सिंह, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. लोवी राज गुप्ता, गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार के वीसी प्रो. बीआर कंबोज, राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पटियाला के वीसी प्रो. जीएस बाजपेयी, जगत गुरु नानक देव पंजाब स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, पटियाला के वीसी प्रो. करमजीत सिंह, पीयू के पूर्व वीसी प्रो. आरसी सोबती सहित 150 के करीब वीसी हिस्सा लेंगे।