पाकिस्तान वायुसेना ने अभिनंदन को सौंपे जाने का वक्त 2 बार बदला। देरी इसलिए भी हुई, क्योंकि रिहाई से पहले अभिनंदन के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। पाक विमानों की घुसपैठ को नाकाम करने के दौरान अभिनंदन का विमान पाक सीमा में क्रैश हो गया था। भारत ने अभिनंदन की बिना शर्त और सुरक्षित वापसी की मांग की थी। इसके बाद पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद में गुरुवार को एलान किया था कि अभिनंदन को भारत को सौंपा जाएगा।
अभिनंदन को रिसीव करने के लिए वाइस एयर चीफ मार्शल आरजीके कपूर खास तौर पर अटारी बॉर्डर पहुंचे थे। उन्होंने मीडिया को चार लाइन की ब्रीफिंग भी दी। वाइस एयर चीफ मार्शल ने कहा कि अभिनंदन को अभी हमें सौंपा गया है। एसओपी के तहत हम उन्हें मेडिकल चेकअप के लिए ले जाएंगे। यह जरूरी है, क्योंकि वे विमान से इजेक्ट हुए हैं इसलिए उनका पूरा शरीर बेहद दबाव और तनाव से गुजरा है। उनको दिल्ली ले जाया जा रहा है।
जिक्रयोग है कि बुधवार को पाकिस्तान के विमानों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी। उनके निशाने पर हमारे सैन्य ठिकाने थे। वेस्टर्न कमांड की ओर से दो मिग-21 और तीन सुखोई-30 विमानों को इसे रोकने के निर्देश दिए गए। जवाबी कार्रवाई के दौरान अभिनंदन ने पाकिस्तानी एफ-16 विमान को मार गिराया, लेकिन इस कोशिश में उनका विमान भी पाकिस्तानी सीमा में क्रैश हो गया।
उन्हें बंदी बना लिया गया था। पाक सेना ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें अभिनंदन से पूछताछ की जा रही थी। लेकिन, अभिनंदन ने बड़ी ही निडरता से जानकारी देने से इनकार कर दिया था। डीसी अमृतसर शिवदुलार सिंह ने कहा कि देरी की एक वजह यह है कि अभिनंदन इस्लामाबाद में थे, जहां से लाहौर का रास्ता काफी लंबा है। अभिनंदन खुश हैं और उन्होंने मुस्कुरा कर इसे जाहिर भी किया।
विंग कमांडर अभिनंदन की वतन वापसी के लिए शुक्रवार शाम अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी को रद्द कर दिया गया। अधिकारियों ने यह फैसला सुरक्षा कारणों के चलते लिया। दोपहर दो बजे डीसी अमृतसर और एसएसपी देहात ने इसकी अधिकारिक घोषणा की। आईजी बीएसएफ महिपाल यादव ने कहा कि रिट्रीट को कैंसल कर दिया गया है।
इससे पहले 2014 में पाकिस्तान में हुए फिदायीन हमले में 61 लोगों की मौत के बाद दोनों देशों ने तीन दिन तक बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम को नहीं करने का फैसला किया था। हालांकि आखिरी मौके पर पाकिस्तान ने अपनी बीटिंग रिट्रीट कर ली थी, लेकिन समय न होने के कारण भारत इसे नहीं कर सका था। आला अधिकारियों के मुताबिक 1965 और 1971 में भारत-पाक की जंग के दौरान भी यह रिट्रीट नहीं हुई थी।
156 सेकेंड की होती है सेरेमनी
झंडा उतारने की मेन सेरेमनी करीब 156 सेकेंड चलती है, जिस दौरान दोनों देशों के जवान मार्च करते हुए बॉर्डर तक आते हैं। पाकिस्तान की ओर से रेंजर्स और भारत की ओर से बीएसएफ के जवान इसमें शामिल होते हैं। दोनों तरफ तल्खी व तनाव भी होता है और पैरों को ऊपर उठाकर अपनी तल्खी का इजहार बीएसएफ व पाक रेंजर्स करते हैं। इस दौरान दोनों देशों के गार्ड नाक से नाक की बराबरी तक आते हैं। जवान मार्च के दौरान अपने पैर जितना ऊंचा ले जाते हैं, उसे उतना बेहतर माना जाता है।