इस वजह से धूल और धुएं के कण वातावरण में ऊपर नहीं जा पाते और नीचे ही रह जाते हैं, जिससे वातावरण में धुएं की चादर बन जाती है। जानकारों के अनुसार धुएं की चादर से सिर्फ तेज हवा या बारिश ही छुटकारा दिला सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अभी बारिश के कोई आसार नहीं है। ऐसे में आगामी दिनों में प्रदेश में समस्या बढ़ सकती है।
जमकर हुई आतिशबाजी, देर रात तक छूटे पटाखे
दिवाली पर सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के दिशा-निर्देशों की परवाह नहीं करते हुए लोगों ने जमकर पटाखे छोड़े। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी, लेकिन दिवाली के दिन लोगों ने जमकर सामान्य पटाखे छोड़े। जिससे प्रदेश की हवा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई।
दिवाली पर छह बजे से देर रात दो बजे तक पटाखे छूटते रहे। वातावरण पर पटाखों का असर रात से ही दिखने लगा था। रात से ही धुंध छाने लगी थी और प्रदूषण भी बढ़ने लगा था।
दिवाली की रात सिरसा का एयर क्वालिटी इंडेक्स 1098 था। सोमवार को यह नीचे आया। प्रदूषण कम होने में अभी समय लगेगा। आतिशबाजी के कारण प्रदूषण बढ़ा है। - सुनील श्योराण, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, हिसार।
पंजाबियों ने इस बार ग्रीन दिवाली को तरजीह दी, जिससे हवा में प्रदूषण कम घुला। पंजाब पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से किए जा रहे एयर क्वालिटी सर्वे में यह खुलासा हुआ है। वहीं सरकार के दावों के विपरीत राज्यभर में दिवाली पर 2231 जगहों पर पराली जलाई गई।
पीपीसीबी के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. चरनजीत सिंह ने बताया कि अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, खन्ना, पटियाला, बठिंडा. मंडी गोबिंदगढ़ व रोपड़ में लगे हवा प्रदूषण मापक यंत्र के आधार पर दिवाली वाले दिन पंजाब का औसतन हवा गुणवत्ता सूचक अंक 210 रिकॉर्ड किया गया।
यह पिछले साल के औसतन 234 के मुकाबले 10.25 प्रतिशत और 2017 के औसतन 328 के मुकाबले 36 प्रतिशत कम है। वहीं दिवाली पर भी कुल 2231 जगहों पर पराली को आग लगाने की घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। इसके बावजूद दिवाली वाले दिन हवा गुणवत्ता सूचक अंक में गुणात्मक सुधार बहुत ही उत्साहजनक रहा है।
पीपीसीबी चेयरमैन प्रो. एसएस मरवाहा ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों में, सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में पटाखों न चलाने को लेकर चलाई गई जागरूकता मुहिम का रोल अहम रहा।
उन्होंने बताया कि 2018 में हवा में औसतन पार्टीकुलेट मैटर (धूल के कण) .10 277 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 126 माइकोग्राम प्रति घनमीटर के मुकाबले इस साल यह 212 और 117 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकॉर्ड किए गए। जो 23.46 और 7.14 प्रतिशत कम है।
2017 के मुकाबले यह 52 प्रतिशत और 48 प्रतिशत कम है। चेयरमैन ने कहा कि देर शाम 8 बजे से रात 10 बजे तक ही पटाखे चलाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों ने भी पिछले कई सालों से चले आ रहे रुझान के अनुसार इस साल भी पंजाबियों ने ग्रीन दिवाली मनाने को तरजीह दी है।