जेल में लगे इन कैमरों की मॉनीटरिंग के लिए कंट्रोल एंड कमांड सेंटर भी बनाया जा रहा है। यहां एक जगह से सभी जेलों की गतिविधि देखी जा सकेंगी। इसके अलावा जेल में वर्चुअल दीवार बनाई जाएगी जिस पर सारी चीज नजर आएगी। अधिकारियों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में काम करने वाली कंपनी ही देखभाल से लेकर अन्य सारी जिम्मेदारी उठाएगी। सूबे में 26 जेल हैं। इनमें करीब 30 हजार कैदी हैं। इनमें कुछ केंद्रीय जेल भी हैं।
यह विशेषता है इन कैमरों की
राज्य की जेलों में पहले से सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। हालांकि गत समय में हो रही गतिविधियों के चलते अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस कैमरे लगाने का फैसला लिया गया है। इनकी सबसे विशेष बात यह है कि आम कैमरों में रात को लाइट पड़ने पर रिकॉर्डिंग खराब हो जाती है जबकि यह कैमरे मूवमेंट के हिसाब से चलते हैं। गाड़ियों के नंबर और चेहरों को एकदम से पहचान सकते हैं और फोन पर अलर्ट देने में भी सक्षम हैं। इसके अलावा मूवमेंट पहचान में सक्षम है। यह आवाज से लेकर अन्य चीजों को कैच करने में सक्षम भी हैं।
जेल ब्रेक कांड समेत कई घटनाएं हो चुकी
पंजाब की जेलें गत कई साल से सुर्खियों में रही हैं। 2015 में नाभा जेल ब्रेक कांड हुआ था। उस समय कई खूंखार कैदी मौका पाकर जेल से भाग गए थे। इसके बाद पंजाब की सारी जेलों की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। जेलों की दीवारों की ऊंचाई बढ़ाने से लेकर करंट वाले तार लगाए थे। इसके बाद कैदियों के भिड़ने की घटनाएं आम हो गईं। इस तरह कैदियों के भिड़ने से कई लोगों की जान तक जा चुकी है। इसके बाद अब खूंखार कैदियों को अलग रखा जाता है। जेलों में नशा और मोबाइल मिलना आम बात है। अब तक सात हजार से ज्यादा मोबाइल पकड़े जा चुके हैं। कई पुलिस वालों पर भी गाज गिरी है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब कैदियों की बैरकों की दो बार चेकिंग होती है।