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Chandigarh News: सिरे चढ़ेंगे एनएचएआई के रुके प्रोजेक्ट, पंजाब के डीजीपी को पुलिस बल मुहैया करवाने का आदेश

Tue, 24 Oct 2023 11:31 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान हरियाणा व पंजाब के एजी, एसीएस रेवेन्यू, एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी और सड़क व परिवहन मंत्रालय के उपसचिव से एनएचएआई के भूमि का कब्जा लेने में आने वाली बाधाओं के मुद्दे को हल करने में सहायता मांगी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की रुकी हुई परियोजनाएं जल्द पूरी करने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डीजीपी को अधिगृहित भूमि का कब्जा दिलाने के लिए पुलिस सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही पुलिस बल मुहैया करवाने में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भी आदेश दिया है।

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एनएचएआई ने याचिका दाखिल करते हुए भारतमाला परियोजना के तहत मेमदपुर (अंबाला)- बनूड़ (आईटी सिटी चौक)- खरड़ (चंडीगढ़) गलियारे के लिए भूमि के संबंध में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को चुनौती दी थी। एनएचएआई ने याचिका में कहा था कि वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हुए राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बेहद अधिक मुआवजा तय किया जा रहा है। पंजाब में 13000 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी और बताया कि राशि जमा करने के बावजूद कब्जा नहीं दिया गया है। दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे, लुधियाना रूपनगर से खरड़ हाईवे, लुधियाना-बठिंडा हाईवे इसी वजह से लंबित हैं।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान हरियाणा व पंजाब के एजी, एसीएस रेवेन्यू, एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी और सड़क व परिवहन मंत्रालय के उपसचिव से एनएचएआई के भूमि का कब्जा लेने में आने वाली बाधाओं के मुद्दे को हल करने में सहायता मांगी।

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एनएचएआई संबंधित अधिकारी को अधूरी/लंबित परियोजनाओं की सूची उपलब्ध कराए और मुख्य सचिव सक्षम प्राधिकारी को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश जारी करें। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि दो महीने के भीतर बाधा मुक्त कब्जा एनएचएआई को दिलाया जाए। ऐसे मामलों में अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता ली जाए और एनएचएआई को सहायता न मिलने पर पंजाब के मुख्य सचिव से संपर्क करें।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एनएचएआई को 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुरूप एनएचएआई अधिनियम में उचित संशोधन करने का भी सुझाव दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि एनएचएआई अधिनियम में मध्यस्थता की प्रक्रिया का प्रावधान है जो भूमि अधिग्रहण में देरी का मुख्य कारण है। हाईकोर्ट ने एनएचएआई को आदेश दिया कि दोनों राज्यों के मुख्य सचिव को उन मुआवजा आदेश की जानकारी दी जाए जो आपत्तिजनक हैं। इस सूची के मिलने के बाद संबंधित अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और मुआवजे के वैध आदेश जारी किए जाएं।
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