एनएचएआई संबंधित अधिकारी को अधूरी/लंबित परियोजनाओं की सूची उपलब्ध कराए और मुख्य सचिव सक्षम प्राधिकारी को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश जारी करें। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि दो महीने के भीतर बाधा मुक्त कब्जा एनएचएआई को दिलाया जाए। ऐसे मामलों में अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता ली जाए और एनएचएआई को सहायता न मिलने पर पंजाब के मुख्य सचिव से संपर्क करें।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एनएचएआई को 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुरूप एनएचएआई अधिनियम में उचित संशोधन करने का भी सुझाव दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि एनएचएआई अधिनियम में मध्यस्थता की प्रक्रिया का प्रावधान है जो भूमि अधिग्रहण में देरी का मुख्य कारण है। हाईकोर्ट ने एनएचएआई को आदेश दिया कि दोनों राज्यों के मुख्य सचिव को उन मुआवजा आदेश की जानकारी दी जाए जो आपत्तिजनक हैं। इस सूची के मिलने के बाद संबंधित अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और मुआवजे के वैध आदेश जारी किए जाएं।