किसानों और कृषि से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने और उन्हें लागू कराने वाले कृषि अफसरों के आधे से अधिक पद खाली ही पड़े हैं। फील्ड में सक्रिय ये वे अफसर है जो कृषि विभाग में सरकारी नीतियों व योजनाओं से किसानों को जोड़ने में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं।
लेकिन हैरत की बात यह कि कृषि विभाग हरियाणा ने आज तक इन अफसरों के खाली पड़े पदों को भरने के लिए कोई खास गंभीरता नहीं दिखाई है। विभाग में इन अफसरों के अधिकृत पद करीब 1260 हैं, जिनमें से लगभग 500 पदों पर ही आज ये अफसर तैनात हैं, शेष सीटें रिटायरमेंट के बाद रिक्त हो चुकी है। अफसरों की इसी कमी की वजह से मौजूदा कृषि अफसर भी अतिरिक्त कार्यभार और वर्कलोड के भार तले दबे हुए हैं।
कृषि विकास में इन अफसरों की यह भूमिका
- यही कृषि अफसर फील्ड में कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा नए बीजों व कृषि के तरीकों पर नई रिसर्च एवं तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर उन्हे इसका इस्तेमाल करने को प्रेरित करते हैं।
- बीज उपचार विधि, बीमा योजना, फसल विविधकरण इत्यादि के लिए यही अफसर किसानों को जोड़ते हैं।
- फील्ड में ओलावृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं की वजह से फसलों के नुकसान का अपडेट भी विभाग को यही अफसर करते हैं।
- साल में कितनी बारिश पड़ी, उसका फसलों पर क्या असर रहा, यही अफसर विभाग को अपडेट करते हैं।
- किसान मेलों व शिविरों के लिए विभिन्न गांवों से किसानों को एकत्रित कर उन्हे ऐसे आयोजनों का हिस्सा बनाने में भी इन अफसरों की बड़ी भूमिका रहती है।
दो साल से प्रोमोशन भी लटकी
वर्कलोड के साथ-साथ दो साल से इन अफसरों की तरक्की भी लटकी पड़ी है। कृषि विकास अफसरों के फिलहाल 65 केस ऐसे हैं, जो प्रोमोशन का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इनके केस सरकार को भेजे गए थे, लेकिन अभी तक मामला सिरे नहीं चढ़ा है। इन अफसरों को बीएओ, सब डीओ, एसएमएस, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी, असिस्टेंट कैन डेवलपमेंट अफसर इत्यादि पदों पर प्रोमोशन दी जाती है। मगर प्रोमोशन अटके होने की वजह से कर्मचारी मायूस है।
कृषि सहायक अधिकारियों के रिक्त पदों का मामला विभाग के पास विचाराधीन है। इस मामले में अभी प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है जल्द इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।
- अजीत बाला जोशी, निदेशक, कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग, हरियाणा