इसरो और नासा के चित्रों के आधार पर सरस्वती के बहाव क्षेत्र में चल रही खुदाई में आठ से दस फुट नीचे लगातार जल मिलता जा रहा है। मुगलवाली गांव के बाद अब बिलासपुर के रूलाहेड़ी गांव में भी सरस्वती नदी का जल निकल आया है। यह जल भी मुगलवाली गांव में जमीन से निकले पानी की तरह है। प्रशासनिक अधिकारी इसे भी सरस्वती नदी का जल मान रहे हैं।
उधर, मुगलवाली गांव में सरस्वती नदी का जल निकलने का पता चलने पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भूगर्भ वैज्ञानिक गांव में पहुंचे और जमीन से निकल रहे पानी के सैंपल लिए। सरस्वती के जल को देखने के लिए आसपास के लोग भी पहंच रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में बुधवार को भी मुगलवाली गांव में खुदाई का कार्य जारी रहा।
डीडीपीओ गगनदीप सिंह ने बताया कि मुगलवाली गांव में जमीन से पानी निकलने के बाद यहां करीब 10 फुट गहराई तक खुदाई की जाएगी। हमें पूरी उम्मीद है कि जमीन से प्रचुर मात्रा में सरस्वती नदी का जल निकलेगा।
यहां सरस्वती की धारा होने के प्रमाण
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जियोलॉजी (भू-विज्ञान) विभाग के चेयरमैन प्रो. डॉ. एआर चौधरी अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्राथमिक दृष्टि से ऐसा लग रहा है कि यहां पर जल स्रोत बहता था।
प्राथमिक चरण में यह किसी पुरानी नदी का रिवर-बैड प्रतीत होता है। रेत, पत्थरों व खनिजों की पांच परतें यहां नदी का होना सिद्ध करती हैं। यहां पर छह-सात फुट पर पानी मिलने से इसकी प्रमाणिकता सिद्ध होती है। उनका कहना है कि बहुत सारी धाराएं मिलकर सरस्वती के वेग को बढ़ाती थीं। हो सकता है कि इनमें से एक धारा यह भी हो।