पंजाब दा कैप्टन ब्रांड को स्थापित करने में आईपैक ने झोंकी ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बाद अब कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को ब्रांड बनाने में पूरी ताकत झोंक दी है। पंजाब की सियासत में यह किसी भी पार्टी के लिए पहला मौका है, जब पूरी की पूरी कैंपेन किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमट गई है।
प्रशांत किशोर ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी को ब्रांड के रूप में स्थापित किया था। तब देश भर में नमो कैंपेन चला। उसके बाद बिहार विधानसभा के चुनाव में उन्होंने नितीश कुमार को ब्रांड बनाया। इसी तर्ज पर प्रशांत की आईपैक टीम ने अब पंजाब में कैप्टन को ब्रांड बनाने में जुट गई है। कोशिश की जा रही है कि लोगों को बार-बार पंजाब दा कैप्टन ब्रांड याद दिलाया जाए। इसकी शुरुआत कुछ दिनों पूर्व कॉफी विद कैप्टन से की गई थी। उसके बाद हर अभियान में बार-बार यही शब्द दोहराया जा रहा है।
आईपैक की मंशा से है कि कोई भी इसे मिस न कर सके। घर हो या सड़क, ड्राइविंग करते समय या ऑनलाइन सर्फिंग करते समय, कहीं न कहीं लोगों तक चाहूंदा है पंजाब, कैप्टन दी सरकार का मैसेज पहुंच सके। इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रचार सामग्री का इस्तेमाल किया गया जा रहा है। दस लाख की-चेन, पचास हजार बैज, 41 लाख डोर स्टिकर, आठ लाख मोबाइल स्टिकर, 53 हजार कार स्टिकर, पचास हजार झंडे, 42 हजार झोले बांटे गए, एक लाख वर्ग फीट वाल पेंटिंग की गई है।
ऐसे ब्रांड बने थे मोदी और नितीश
प्रशांत किशोर
- फोटो : फाइल फोटो
इनके अलावा पंजाब में चल रहीं 26 पंजाब कांग्रेस एक्सप्रेस वैन के जरिए भी बार-बार लोगों के कानों तक यह मैसेज पहुंचाने का प्रयास जारी है। कैंपेन सॉन्ग में भी कैप्टन दी सरकार वाले स्लोगन को प्रमुखता दी गई है। प्रचार सामग्री में की-चेन इसलिए चुने गए, ताकि यह लंबे समय तक लोगों को याद दिलाने में सहायक हो सकते हैं। बाद में चलाई गई सभी कैंपेन में लोगों को जो फार्म दिए गए, उन पर भी यह लोगो लगाया गया।
इनमें कर्जा माफी फार्म, हलके विच कैप्टन के शिकायत निवारण फार्म और अब बेरोजगारी भत्ता कार्ड पर यह लोगो है। मकसद यह है कि लोगों के घर में कोई न कोई ऐसी चीज हो जो पंजाब का कैप्टन से संबंधित हो। आई-पैक यह मान कर चल रही है कि मजबूत ब्रांड रिकॉल वैल्यू का वोटिंग पैटर्न से सीधा संबंध है। पंजाब के चुनावी इतिहास में पहली बार कोई कैंपेन किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमटी है। कांग्रेस, अकाली दल या भाजपा में इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। यह पहला मौका है कि कांग्रेस के भी राष्ट्रीय नेता कैंपेन से बाहर हैं।
ऐसे ब्रांड बने थे मोदी और नितीश
साल 2014 के लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी की ऐसी आंधी चली कि सबको उड़ा ले गई। भाजपा उनके नाम पर पूरे देश में जीत गई। इसके लिए नमो ब्रांडिंग की गई। चाय पर चर्चा, 3डी रैली, स्टैचू ऑफ यूनिटी रन जैसी कैंपेन चलाई गईं। मोदी जी आने वाले हैं.. वैन चलाई गईं। नमो पेन, नमो कप, नमो टोपी से ब्रांड को घर-घर तक पहुंचाया गया। फिर बिहार विधानसभा चुनाव में इसी तर्ज पर प्रशांत किशोर की टीम ने नितीश कुमार को ब्रांड के रूप में स्थापित किया। वहां नारा दिया गया, बिहार में बहार हो, नितीशे कुमार हो। इस पर गाना बना, रिंग टोन भी लॉन्च किया गया। नितीश को स्थापित करने के लिए हर घर दस्तक, नितीश के सात वचन, बिहार स्वाभिमान कैंपेन के साथ-साथ मोदी के खिलाफ जुमला बाबू मुहिम चलाई गई। इसमें भी कैलेंडर, मोबाइल स्टिकर, डोर स्टिकर का भरपूर इस्तेमाल किया गया।