पंजाब विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के लिए अफगानिस्तान से सर्वाधिक संख्या में छात्र आते हैं। कैंपस में 100 से अधिक अफगानी छात्र हैं। अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अलग से छात्रावास बनाया गया है। यहां रह रहे 50 फीसदी छात्र दो साल से अपने घर नहीं गए हैं, क्योंकि कोरोना के कारण आवागमन पर रोक लगी थी। कुछ छात्र गए तो वह वापस नहीं लौटे।
पीयू में रह रहे अफगानी छात्रों के मुताबिक, पीयू के 40 से अधिक छात्र अफगानिस्तान से नहीं लौटे हैं। अब उन्हें वीजा भी नहीं मिल रहा और न कोई फ्लाइट है। उनके दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कुछ छात्र जून में अफगानिस्तान से यहां आए थे। उनका वीजा खत्म होने वाला है। उसको आगे बढ़वाना था लेकिन वर्तमान हालातों के कारण उनकी डेट भी नहीं बढ़ पाई है। इससे छात्र परेशान हैं। इन छात्रों के अलावा चंडीगढ़ व आसपास के कॉलेजों में 300 अफगानी छात्र शिक्षा पा रहे हैं, जो काफी समय से अपने घर नहीं गए हैं। किसी ने अगले माह घर जाने की योजना बनाई थी तो किसी ने अक्तूबर में। इन सबके ख्वाब धरे के धरे रह गए। नाम न छापने की शर्त पर कुछ छात्रों ने बताया कि उनके सभी ख्वाब अब चकनाचूर हो गए हैं। उन्हें अपने माता-पिता, भाई-बहन की चिंता सता रही है। वह यहां आना चाहते हैं लेकिन बेबस हैं। हालात ऐसे हैं कि वह अपने परिवार के लिए कुछ नहीं कर पा रहे।
उम्मीद थी कि तालिबानी काबुल में प्रवेश नहीं कर पाएंगे लेकिन दो दिन पहले ही वह पहुंच चुके हैं। अब पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान की हुकूमत है। परिवार के लोग वहां फंसे हैं। उन्होंने संदेश भेजा है कि ‘अफगानिस्तान नहीं आना और हो सके तो हमें भी यहां से निकालने का कोई रास्ता ढूंढो’। मेरे भाई-भाभी यहां इलाज के लिए आए थे, अब वह भी वहां नहीं जा पा रहे हैं। वहां के लिए कोई फ्लाइट नहीं है। तीन और पांच साल के भतीजे अफगानिस्तान में ही हैं। उनकी बहुत चिंता सता रही है। 30 घंटे से नहीं सोया हूं। तनाव लगातार बढ़ रहा है। समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं। हमारे सभी सपने चकनाचूर हो गए। पीयू के कई छात्र वहां फंसे हैं, उनको भी वीजा नहीं मिल रहा। भारत सरकार अफगानी छात्रों और वहां के लोगों के लिए वीजा आदि की व्यवस्था करे।
-अब्दुल मुनीर काकर, शोधार्थी पीयू
वीजा खत्म होने वाला है, पैसे भी नहीं हैं, सरकार मदद करे
स्नातक व परास्नातक की पढ़ाई करने यहां आया था। अब पढ़ाई पूरी हो गई है तो घर जाने की तैयारी कर रहा था। परिवार के लोग मेरे स्वागत की तैयारी में लगे थे। समाज के लोगों को दावत दी जाती, लेकिन वहां अब हालात ही बिगड़ चुके हैं। मेरा वीजा खत्म होने वाला है। उसको आगे नहीं बढ़ाया जा रहा। परिवार के लोग कह रहे हैं कि यहां मत आना, कर्फ्यू लगा है। बाहर जाने-आने की मनाही है। यहीं पर वर्क वीजा लेकर नौकरी ढूंढो। मेरे पास पैसे भी नहीं बचे। पिता एक दफ्तर में काम करते थे लेकिन वह कई माह से बंद है। घर में भी पैसों का संकट है। यहां की सरकार हमारी मदद करे। पूरी रात नहीं सो पा रहा हूं। पता नहीं आगे क्या होगा।
-इरफान खान, एमए अर्थशास्त्र पीयू
एनएसयूआई ने कहा, अफगान में फंसे छात्रों को बुलाया जाए
एनएसयूआई के अध्यक्ष निखिल नरमेटा ने विदेश मंत्री को ट्वीट कर कहा है कि चंडीगढ़ समेत पूरे देश में बड़ी संख्या में अफगानी छात्र शिक्षा पा रहे हैं। इनमें से कई वर्तमान हालातों के कारण वहां फंस गए हैं। उनकी पढ़ाई का सपना पूरा करने के लिए उन्हें जल्द से जल्द अफगानिस्तान से यहां लाया जाए।
अफगानिस्तान के छात्रों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। डीन इंटरनेशनल को जिम्मेदारी दी गई है कि वह यह कार्य देखें। -प्रो. वीआर सिन्हा, डीयूआई पीयू