चंडीगढ़ में प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के नए आदेश ने हड़कंप मचा दिया है। आदेश में अधिकारियों से वित्तीय शक्तियां छीनकर गृह मंत्रालय को सौंप दी गई हैं, जिसके चलते इंजीनियरिंग विभाग के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है।
स्थिति यह है कि बुधवार को अलग-अलग विभागों के टेंडर तो खोले गए लेकिन स्पष्टीकरण आने तक उनका अलॉटमेंट रोक दिया गया है। नए छोटे प्रोजेक्ट्स को लेकर भी बहुत असमंजस है, जिससे नए काम लगभग ठप पड़ गए हैं।
केंद्र सरकार के निर्देशों पर मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने अधिकारियों के वित्तीय शक्तियों को लेकर एक आदेश जारी किया जिसमें विभागों के प्रमुखों से वित्तीय शक्तियां छीनकर केंद्रीय गृह मंत्रालय को दे दी गईं। नए आदेश के तहत योजनाओं की मंजूरी, एडमिनिस्ट्रेटिव अप्रूवल और खर्च (वर्क्स सहित), पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) प्रोजेक्ट्स और टेंडरों की स्वीकृति की शक्तियां विभागाध्यक्ष (एचओडी), चीफ इंजीनियर, एडमिन सेक्रेटरी और मुख्य सचिव से वापस ले ली गई हैं।
अब इन सभी मामलों में अंतिम मंजूरी गृह मंत्रालय से ही मिलेगी। पहले एचओडी को 1.50 करोड़, चीफ इंजीनियर को 3 करोड़, एडमिन सेक्रेटरी को 20 करोड़, मुख्य सचिव को 50 करोड़ और प्रशासक को 100 करोड़ तक की स्वीकृति का अधिकार था जिसे समाप्त कर दिया गया है। इस आदेश के बाद अब प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारी समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या अब छोटे-छोटे कुछ लाख के कार्यों के लिए भी अब एमएचए से मंजूरी लेनी पड़ेगी।
अधिकारी परेशान
इस आदेश के बाद इंजीनियरिंग विभाग में असमंजस की स्थिति बन गई है। आदेश में साफ तौर पर सभी तरह के प्रोजेक्ट और स्कीम्स के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी की बात कही गई है जिससे इंजीनियरों में संशय बढ़ गया है। इंजीनियरिंग विभाग के एक निचले अधिकारी ने बताया कि मंगलवार के आदेश के बाद सारे नए काम लगभग ठप हो गए हैं। एचओडी के पास कोई वित्तीय शक्ति नहीं होने की वजह से काफी असमंजस है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि नए छोटे विकास के काम जो 5 लाख, 10 लाख इसके आसपास की राशि के होंगे, उनका क्या होगा। क्या उसे भी मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजना होगा। सभी अधिकारी एक-दूसरे को फोन करके इस बारे में पूछते रहे। इसी असमंजस में बुधवार को कई टेंडर खुले लेकिन उन्हें अगले आदेश तक अलॉट नहीं किया जाएगा। सभी स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं। इस पर प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुछ बिंदुओं पर और स्पष्टीकरण की जरूरत है जिसकी उम्मीद है कि जल्द ही जारी कर दिया जाएगा।
जिन कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी नहीं हुए, वो सारे काम रुकेंगे
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो योजनाएं पहले से चल रही हैं या जिनके वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं, वे पुराने प्रावधानों के तहत ही चलेंगी। लेकिन नई योजनाओं और नए टेंडरों के मामलों में अब गृह मंत्रालय की स्वीकृति अनिवार्य होगी। ऐसे में जो टेंडर खुल भी गए हैं लेकिन अवॉर्ड ऑफ कांट्रैक्ट नहीं हुआ है, वो काम भी रुक जाएंगे। हालांकि, तकनीकी स्वीकृति के मामलों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। एक्सईएन को 30 लाख, एसई को 1.80 करोड़ और चीफ इंजीनियर को फुल पावर पहले की तरह ही रहेंगे। इसी तरह आपात स्थिति में मुख्य सचिव को 10 करोड़ तक की डायरेक्ट खरीद की अनुमति भी जारी रहेगी।
जेम से खरीद की सीमा बढ़ाई
कुछ क्षेत्रों में अधिकारियों की सीमा बढ़ाई भी गई है। अब सामान्य खरीद और कॉन्ट्रैक्ट (ओपन या लिमिटेड टेंडर), जो जेम के माध्यम से होता है, उसके लिए एचओडी की सीमा 2 करोड़ से बढ़ाकर 4 करोड़, एडमिन सेक्रेटरी की सीमा 15 करोड़ से बढ़ाकर 30 करोड़ और मुख्य सचिव की सीमा 50 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ कर दी गई है। मिसलेनियस खर्च के लिए एचओडी को 4 करोड़, एडमिन सेक्रेटरी को 30 करोड़ और मुख्य सचिव को 100 करोड़ तक का अधिकार दिया गया है। माना जा रहा है कि आदेश लागू होने के साथ ही अब चंडीगढ़ प्रशासन के वित्तीय मामलों में गृह मंत्रालय की सीधी निगरानी हो गई है।