चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर।
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चंडीगढ़ के एस्टेट ऑफिस में जो फाइलें जलाई गईं थीं, वे डिजिटली सेव थीं। इस मामले में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और उन्होंने डीजीपी को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गहन जांच के निर्देश दिए।
सूत्रों के अनुसार, एस्टेट ऑफिस में फाइलों के बोझ को कम करने के लिए पिछले काफी समय से एक-एक करके विभिन्न ब्रांचों के फाइलों को डिजिटल रूप में कंप्यूटर में सुरक्षित रखने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए सभी फाइलों को स्कैन किया जाता है और फिर उसे डिजिटली सेव किया जाता है। इसी के लिए ग्रुप-1 ब्रांच की फाइलों को स्कैन किया गया है और एस्टेट ऑफिस के पास स्कैन कॉपी मौजूद है।
हालांकि एस्टेट ऑफिस के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी फाइलों को जलाना गैरकानूनी है। इसके लिए ही चौकीदार पंकज की तलाश की जा रही है और पकड़े जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की शुक्रवार को अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी यह मामला उठाया गया। बदनौर ने डीजीपी संजय बेनीवाल को निर्देश दिए कि वह इस मामले की गंभीरता से जांच करें।
20 जनवरी को एस्टेट ऑफिस के जूनियर असिस्टेंट राकेश कुमार (रिकॉर्ड कीपर) ने शिकायत दी थी कि उन्हें 19 जनवरी को सिपाही कर्मवीर ने बताया था कि 18 जनवरी की सुबह एस्टेट ऑफिस के चौकीदार पंकज ने ग्रुप-1 ब्रांच की आरपी-999, 190 व 396 फाइलें जला दी हैं। शिकायत पर नीलम चौकी में डीडीआर दर्ज की गई थी। जांच के बाद 25 जनवरी को सेक्टर-17 थाने में आरोपी चौकीदार पंकज के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।
एस्टेट ऑफिस की सीसीटीवी फुटेज में आरोपी फाइलें ले जाता हुआ दिखाई दे रहा था। जबकि दूसरी तरफ डिप्टी कमिश्नर मनदीप सिंह ने मामले में रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने एस्टेट ऑफिसर को रिपोर्ट देने को कहा है, ताकि मामले की जांच को आगे बढ़ाया जा सके।
मामले को अब पुलिस देख रही है। इसके अलावा विभागीय जांच भी चल ही रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। - मनीष लौहान, असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर