चंडीगढ़। शहर के कुछ अस्पतालों में जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन के खपत के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन का ऑडिट कराया। एक टीम बनाई गई, जिसमें डॉक्टर व प्रशासन के अधिकारियों को शामिल किया गया। टीम ने जांच की और संचालकों को जागरूक किया तो अब अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत 20 से 25 फीसदी कम हो गई है। यह जानकारी यूटी प्रशासन ने अपनी एक रिपोर्ट में दी है।
यह रिपोर्ट शहर में ऑक्सीजन सप्लाई के नोडल अधिकारी यशपाल गर्ग की तरफ से सोमवार को जारी की गई, जिसमें टीम के सभी कार्यों का विवरण है। इस कमेटी में पीसीएस जगजीत सिंह, डॉ. मनजीत सिंह और डॉ. मनप्रीत सिंह शामिल थे, जिन्होंने पिछले 20 दिनों में सभी सरकारी, निजी अस्पतालों और कोविड केयर सेंटरों का दौरा किया था। अलावा आक्सीजन प्लांट, सिलिंडर और सभी उपकरणों के सही उपयोग और उनकी जांच भी की गई थी।
प्रशासन ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि चंडीगढ़ में सभी ऑक्सीजन जनरेट करने वाले प्लांट शहर के ही स्वास्थ्य संस्थानों की जरूरतों को पूरा करें। इसके अलावा मेडिकल ऑक्सीजन सिलिंडर की रिफिलिंग जीएमसीएच-32 द्वारा तय किए गए दाम पर करने के निर्देश दिए गए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहर में तीन वेंडर ऑक्सीजन सिलिंडर को रिफिल करने का काम कर रहे हैं। प्रशासन की टीम ने वहां जाकर भी जांच की और रोजाना की रिपोर्ट भी मांगी गई। हिमाचल प्रदेश के बरोटीवाला प्लांट से स्वास्थ्य मंत्रालय ने चंडीगढ़ के लिए प्रतिदिन 20 एमटी कोटा मेडिकल ऑक्सीजन का निर्धारित किया है, जो सभी अस्पतालों में इस्तेमाल हो रहा है। प्रशासन ने पिछले सप्ताह शहर के सभी निजी अस्पतालों के लिए तय किए ऑक्सीजन के कोटे और एजेंसी की बाध्यता को भी खत्म करने का फैसला लिया था। इसके तहत किसी भी अस्पताल को ऑक्सीजन रिफिलिंग एजेंसी से जितने मर्जी ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने की इजाजत दी गई थी। बता दें कि ऑक्सीजन की अचानक बढ़ी खपत को देखते हुए ऑक्सीजन सप्लाई के नोडल अधिकारी यशपाल गर्ग ने 11 मई को शहर के सभी निजी अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन का कोटा तय कर दिया था।