चंडीगढ़। प्रशासन पर प्रॉपर्टी टैक्स के 10 करोड़ 23 लाख रुपये बकाया है। नगर निगम ने प्रशासन की 150 से ज्यादा सरकारी इमारतों को चिन्हित किया है। साथ ही रोड विंग व बिजली विभाग को नोटिस जारी कर दिया है। निगम ने इन इमारतों को अपनी डिफाल्टर सूची में शामिल किया है।
नगर निगम के अतिरिक्त कमिश्नर अनिल गर्ग ने बताया कि 2004 से 31 मार्च 2021 तक सरकारी इमारतों के टैक्स का ब्योरा देखा गया था। इसमें इन बिल्डिंगों को डिफाल्टर माना गया है। सभी विभागों के अधिकारियों से कहा है कि जल्द टैक्स भर दें ताकि आगे की कार्रवाई से बचा जा सके। समय रहते इन इमारतों का टैक्स नहीं भरा गया तो सील करने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं निगम ने बिजली विभाग को 35 लाख रुपये का नोटिस भेजा है।
2020-21 के लिए रखा है 54 करोड़ का लक्ष्य
नगर निगम हर साल प्रॉपर्टी और हाउस टैक्स से 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई करता है। साल 2020-21 के लिए नगर निगम ने 54 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि अगस्त में सेल्फ असेसमेंट स्कीम का लाभ शहर के लोगों को दिया था, इसलिए अब निजी भवन व दुकानों को भी नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब टैक्स जमा करवाने पर ब्याज के अलावा जुर्माना भी लग रहा है। पिछले साल भी नगर निगम ने प्रशासन की कुल 214 इमारतों को नोटिस भेजा था जिनसे 44 करोड़ रुपये की वसूली करनी थी। नगर निगम को इसमें से काफी राशि मिल गई थी।
ये इमारतें हैं शामिल
इस सूची में लेक क्लब, सीएलटीए टेनिस स्टेडियम, रोलर स्केटिंग रिंग, करुणा सदन, सेक्टर-11 और 19 का पुलिस थाना, बाल निकेतन, वृद्धाश्रम, केंद्रीय पुस्तकालय, फुटबॉल स्टेडियम, सेक्टर-17 बस स्टैंड, एस्टेट ऑफिस, यूटी प्रेस ट्रस्ट, स्टेट ट्रांसपोर्ट अथारिटी, सेक्टर-18 का हॉकी स्टेडियम, सेक्टर-23 का स्वीमिंग पूल, सेक्टर-29 ट्रैफिक पुलिस लाइन, सेक्टर-35, 37 सिविल डिस्पेंसरी, सेक्टर-38 बी का सरकारी मॉडल हाई स्कूल, सेक्टर-42 का स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, बेडमिटन हॉल के अलावा कई सेक्टरों के आंगनबाड़ी केंद्र शामिल हैं।
सेक्टर-45 में 2 दुकानें कर दी थीं सील
हाल ही में नगर निगम ने सेक्टर-45 में प्रापर्टी टैक्स जमा न होने पर दो दुकानों को सील भी कर दिया था। हालांकि नगर निगम सरकारी इमारतों पर कार्रवाई करने से कतराता है। कई बार ऐसा हुआ है कि निगम नोटिस भेजकर रिमाइंडर देता रहता है।