तेजिंदर कौर ने बताया कि आयोग ने दो सदस्यीय समिति गठित की। समिति के सदस्यों ज्ञान चंद और प्रभुदयाल ने गांव जाकर पड़ताल की तो पता चला कि पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं। गांव के सरपंच ने मौके पर बयान दिया कि गांव के अन्य व्यक्तियों ने मुझे मजबूर करके यह हुक्म जारी करवाया था।
क्या बनती हैं धाराएं
आयोग की चेयरपर्सन ने सिफारिश की है कि राम सिंह का मामला अत्याचार निवारण एक्ट 1989 (संशोधित 2018) की धारा 3(1)(जेड) के दायरे में आता है। इस मामले में कानूनी राय लेकर प्रस्ताव पास करने वालों, प्रस्ताव लिखने वाले पंचायत सचिव और राम सिंह की शिकायत को दरकिनार करने वाले जिला परिषद के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
पुनर्वास कराएं अधिकारी
आयोग ने बठिंडा के डिप्टी कमिश्नर को पीड़ित व्यक्ति को लाकर उसके गांव में पुनर्वास करवाने के लिए कहा है। साथ ही सामाजिक न्याय, अधिकारिता और अल्पसंख्यक विभाग को पीड़ित को योजना के तहत उचित मुआवजा देने को कहा है।
यह मामला काफी गंभीर है। बठिंडा के जिम्मेदार अधिकारियों से 10 मई को इस मामले में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। साथ ही तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया है। - तेजिंदर कौर, चेयरपर्सन, एससी आयोग, पंजाब।