ट्रेन के पायदान पर सफर करते नौजवान।
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ट्रेन में सफर के दौरान एडवेंचर नौजवानों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। रील बनाने के चक्कर में ज्यादातर नौजवान डिब्बों के पायदन या फिर दरवाजे के पास बैठकर सफर कर रहे हैं और संतुलन बिगड़ने की वजह से चलती ट्रेन से गिरकर हादसों का शिकार हो रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो लुधियाना से ढंडारी और लुधियाना से लाडोवाल तक की रेलवे ट्रैक से प्रतिदिन 2 से 3 शव मिलने आम बात है।
यह सबकुछ जानते हुए भी रेल प्रशासन किसी तरह की पहलकदमी करने के मूढ़ में नहीं है। फिरोजपुर मंडल की ओर से रेलवे नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए न तो कोई जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और न ही नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। नतीजतन ट्रेन से गिरकर होने वाली मौतों के आंकड़े दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं।