मैंने बहादुरगढ़ में भवन निर्माण का ठेका लिया हुआ है। रोजाना की तरह मैं अपने शहर नीमराणा से बहादुरगढ़ जा रहा था। जब मैं झज्जर के बादली फ्लाईओवर पर पहुंचा तो देखा कि मेरे से दो-चार गाड़ी आगे क्रूजर को ट्रॉले ने टक्कर मारी हुई थी। पुलिस ने इशारा किया, मैंने गाड़ी को इनके पीछे खड़ा कर लिया।
हादसे के चलते सभी लोग अपनी-अपनी कार से बाहर निकलकर हादसे को देख रहे थे। मैं भी अपनी कार से बाहर आया ही था कि इसी दौरान एक ट्राले ने मेरी कार को भी पीछे से टक्कर मार दी। इससे कार अगली कार से जा टकराई। भगवान का लाख शुक्र है कि उस दौरान मैं कार में नहीं था। आज भगवान ने मेरी जान बचा ली। --जैसा कि हादसे का शिकार बनने से बचे नीमराणा के मनीष ने बताया
जाना मुझे था, लेकिन मैंने अपनी भाभी को भेज दिया
नजफगढ़ शोक जताने तो मुझे जाना था, लेकिन मैंने अपनी भाभी प्रेमलता को भेज दिया। मुझे पशुओं के लिए सानी कटवानी थी, इसलिए मैं नहीं जा सका। उसे क्या पता था कि वे शोक जताने के लिए नजफगढ़ ही नहीं पहुंच पाएंगे। हादसे में मेरी भाभी प्रेमलता की मौत हो गई, जिसके लिए मैं खुद पर अफसोस कर रहा हूं कि अगर मैंने उसे वहां नहीं भेजा होता तो आज हमारे बीच होती। -जितेंद्र, मृतका प्रेमलता का देवर।
हादसे में क्षतिग्रस्त वाहन